डैम बना तो टापू बन जायेगा लाटू गांव, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

सात गांवों के ग्रामीण होंगे प्रभावित

सात गांवों के ग्रामीण होंगे प्रभावित संतोष, बेतला कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मंडल डैम निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. सरकार के प्रस्ताव में सात गांवों को पुनर्वासित करने की योजना है. इस प्रस्ताव की सराहना कई लोगों ने की है, लेकिन प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण खासे चिंतित हैं. मंडल डैम से सबसे ज्यादा संकट गारू प्रखंड के लाटू गांव पर मंडराने लगा है. भौगोलिक स्थिति के कारण इस गांव से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बुढ़ा नदी होकर जाता है. डैम निर्माण के बाद नदी में सालोभर 10 से 15 फीट पानी भरा रहेगा. नदी पर पुल का अभाव लाटू गांव को टापू बना देगा. पांच दिन में तबाह हो जायेंगे लोग उत्तर कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) के निर्माण हेतु वन विभाग ने स्वीकृति विभिन्न शर्तों के साथ दी है. इनमें एक शर्त यह भी है कि डैम का पानी तय सीमा से ऊपर जाने पर सिंचाई विभाग पांच दिनों के भीतर उसे नियंत्रित करेगा. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल को तो पानी से पांच दिनों में खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन कच्चे मकानों वाले गांव पांच दिनों में पूरी तरह तबाह हो जायेंगे. पानी की ऊंचाई पांच फीट बढ़ते ही नवरनागु, कोरवाटोली, बेरे और लाटू गांव जलमग्न हो जायेंगे. इन गांवों में मुख्यतः आदिवासी एवं आदिम जनजाति के लोग रहते हैं. कच्चे मकान पानी में 24 घंटे भी नहीं टिक पाएंगे और जान-माल की क्षति होना तय है. ग्रामीणों ने डीसी को लिखा पत्र लाटू सहित आसपास के गांवों के लोगों ने उपायुक्त को पत्र लिखकर अपनी समस्या से अवगत कराया है. पूर्व प्रमुख मंगल उरांव ने कहा कि डैम निर्माण से पूर्व सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में जान-माल की हानि न हो. ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना की शुरुआत में डूब क्षेत्र में 18 गांव शामिल थे और मुआवजा भी बांटा गया था. लेकिन अब डैम की ऊंचाई कम करने के बाद सिंचाई विभाग केवल सात गांवों को प्रभावित मान रहा है.

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Author: DEEPAK

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