बारियातू़ प्रखंड के इटके गांव में पिछले करीब एक वर्ष से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-1 का संचालन वैकल्पिक रूप से धुमकुड़िया भवन में किया जा रहा है. इसका मुख्य कारण मूल आंगनबाड़ी भवन का पूरी तरह जर्जर होना है. एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो जर्जर भवन की मरम्मत करायी गयी और न ही नये भवन निर्माण की पहल हुई. इस बीच अब आदिवासी समाज के लोगों ने धुमकुड़िया भवन को खाली करने की मांग तेज कर दी है, जिससे केंद्र के संचालन पर संकट गहराने लगा है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मूल भवन की छत से प्लास्टर और कंक्रीट गिरते रहते हैं, जिससे पूर्व में सहायिका व कुछ बच्चे घायल भी हो चुके हैं. बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी तौर पर छह माह के लिए धुमकुड़िया भवन में केंद्र शिफ्ट किया गया था. ग्रामीण संजय उरांव, भीम उरांव, सुनीता देवी व कलेश्वरी देवी ने कहा कि गांव में धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के लिए धुमकुड़िया ही एकमात्र स्थान है. इसके व्यस्त रहने से पूजा-पाठ और बैठकों में परेशानी हो रही है. बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, जल्द निकलेगा हल : सीडीपीओ : आंगनबाड़ी सेविका शीला देवी ने बताया कि जर्जर भवन की सूचना विभागीय अधिकारियों को दी गयी है. समाज द्वारा भवन खाली करने के दबाव से केंद्र संचालन प्रभावित हो सकता है. सीडीपीओ सह हेरहंज बीडीओ अमित कुमार ने कहा कि मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जायेगा. बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जल्द ही इसका सकारात्मक हल निकाला जायेगा.
धुमकुड़िया भवन से आंगनबाड़ी केंद्र को खाली करने की मांग
धुमकुड़िया भवन से आंगनबाड़ी केंद्र को खाली करने की मांग
