आधा-अधूरा काम कर भाग जते हैं ठेकेदार
बरसात में बड़ी आबादी कट जाती है मुख्यालय से
लातेहार : लातेहार में पांच महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण पिछले दो दशकों से अधर में लटका है. पुल निर्माण के नाम पर ठेकेदार राशि की निकासी कर गायब हो चुके हैं. यही नहीं ये ठेकेदार उग्रवादियों का भय बता कर काली सूची से भी अपना नाम कोर्ट के मध्यम से हटवाने में सफल होते हैं. सरकार का करीब 20 करोड़ रुपये इन पुलों के निर्माण में वर्षों से फंसा है. जिला मुख्यालय से सीधा जुड़ने की आश में हेरहंज-बालूमाथ एवं गारु-महुआडांड़ की बड़ी आबादी बरसात में मुख्यालय से कट जाती है.
1990 से चल रहा है तुबेद नदी पर पुल का निर्माण
हेरहंज-बालूमाथ को जिला मुख्यालय से सीधा जोड़ने वाले डीही-मुरुप नवादा पथ स्थित तुबेद नदी पर पुल निर्माण का वर्ष 1990 से चल रहा है. तीन बार शिलान्यास भी हो चुका है. अंतिम शुरुआत 2006-07 में मेसर्स नंदलाल पांडेय, रेहला गढ़वा द्वारा की गयी. आरइओ अधिकारियों एवं ठेकेदार ने मिलीभगत कर करीब एक करोड़ 13 लाख रुपये की निकासी की, लेकिन निर्माण कार्य आज तक लंबित है. दो करोड़ पांच लाख 65 हजार सात सौ रुपये प्राक्कलन वाली इस योजना को वर्ष 2008 में एजेंसी माओवादियों का भय बताकर गायब हो गयी.
1.72 करोड़ रुपये की निकासी कर भागी एजेंसी
लातेहार- सरयू-गारु मार्ग पर अवस्थित चौपत नदी पर पुल निर्माण का काम पथ निर्माण विभाग द्वारा मेसर्स कुमार कंस्ट्रक्शन गोड्डा द्वारा कराया जा रहा था. 4.57 करोड़ रुपये लागत वाले इस पुल का निर्माण बीच में ही छोड़ कर ठेका कंपनी 1.72 करोड़ रुपये की निकासी कर गायब है. अभी तक के सबसे बड़ी निकासी इसी फर्म द्वारा की गयी है. इस कंपनी के भागने से सप्लायरों का तकरीबन 50 लाख रुपये डूबने की कगार पर है. विभाग एवं ठेकेदार के गठजोड़ से जहां सरकारी राशि की बंदरबांट हो रही है.
32 लाख निकाल कर गायब हो गया ठेकेदार
औरंगा नदी पर वर्ष 2009-10 में ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल द्वारा रांकी कला पुल का निर्माण कार्य शुरू किया गया था. इस कार्य को मेसर्स सत्यदेव प्रसाद जायसवाल द्वारा कराया जा रहा था. महज बेस की ढलाई कर ठेकेदार ने 32 लाख रुपये की निकासी कर ली. माओवादियों का भय बताते हुए काम को बीच में ही छोड़ एजेंसी ने अपना सेट अप छत्तीसगढ़ ले गयी.
छह लाख निकाल लिये, नहीं किया कोई काम
लातेहार- गारु मार्ग पर स्थित कोयल नदी पर पुल का निर्माण पथ निर्माण विभाग द्वारा 6.37 करोड़ रुपये की लागत से मेसर्स कुमार कंस्ट्रक्शन, गोड्डा द्वारा कराया जा रहा था. केवल मशीन गिरा कर एजेंसी ने छह लाख रुपये की निकासी कर ली और एक इंच भी काम नहीं किया. वर्ष 2012-13 में तत्कालीन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के दौरे के उपरांत कोयल एवं चौपत नदी पर पुल बनाने का निर्णय सरयू एक्शन प्लान के तहत लिया गया था, लेकिन आज तक यह योजना पूरी नहीं हो सकी.
स्नैप की ढलाई बीच में छोड़ कर चली गयी कंपनी
सुकरी नदी पुल का निर्माण ग्रामीण विशेष प्रमंडल द्वारा वर्ष 2009-10 में शुरू किया गया. स्नैप की ढलाई बीच में छोड़ एजेंसी प्रसाद कंस्ट्रक्शन लगभग 20 लाख रुपये निकासी करके गायब हो गयी. इसके बाद से पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका.
