दर्जन भर भवनों का निर्माण अधूरा

लातेहार जिला मुख्यालय में तकरीबन एक दर्जन भवन ऐसे हैं, जो वर्षों से अधूरे पड़े हैं. इन भवनों का काम पूरा कराने में न तो प्रशासन रुचि ले रहा है और न ही संबधित विभाग ही दिलचस्पी दिखा रहा है. कई वर्षों तक काम बंद रहने के कारण भवन र्जीण हो रहे हैं. ये हैं […]

लातेहार जिला मुख्यालय में तकरीबन एक दर्जन भवन ऐसे हैं, जो वर्षों से अधूरे पड़े हैं. इन भवनों का काम पूरा कराने में न तो प्रशासन रुचि ले रहा है और न ही संबधित विभाग ही दिलचस्पी दिखा रहा है. कई वर्षों तक काम बंद रहने के कारण भवन र्जीण हो रहे हैं. ये हैं जिला मुख्यालय स्थित बेकार अर्द्धनिर्मित भवन. सुनील कुमार की िरपोर्ट

माप तौल विभाग

कृषि विभाग परिसर में माप तौल कार्यालय पिछले दो वर्षों से बन कर तैयार है, लेकिन विभाग को हस्तगत नहीं हो रहा है. बताया जा रहा है कि यह भवन लगभग 70 लाख रुपये की लागत से बन कर बेकार पड़ा है. एसी समेत कई उपकरण बेकार हो गये हैं.

सिविल सर्जन आवास

धर्मपुर मुहल्ले में सिविल सर्जन आवास का निर्माण पिछले पांच वर्षों से बंद है. करीब 50 लाख रुपये की लागत से बना यह भवन बेकार पड़ा है.

चिकित्सक भवन अधूरा

मननचोटाग की एक निर्जन जगह पर चिकित्सक आवास का निर्माण लगभग पांच वर्ष पूर्व कराया गया. उक्त आवास का निर्माण अधूरा है. कार्यकारी एजेंसी मेसो परियोजना द्वारा इस भवन के अभिकर्ता कनीय अभियंता गुप्तेश्वर राम पर दो लाख 91 हजार 51 रुपये तथा अस्पताल भवन मद में आठ लाख 10 हजार 572 रुपये गबन करने की प्राथमिकी लातेहार थाना (कांड संख्या 143/14) में दर्ज करायी गयी है. इस भवन को भी पूरा कराने में जिला प्रशासन कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है.

नहीं शुरू हुआ ग्रामीण अस्पताल

आदिम जनजातियों को गांव में ही अत्याधुनिक चिकित्सा व्यवस्था मुहैया कराने के लिए सरकार ने एक ग्रामीण अस्पताल की योजना बनायी थी. लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस अस्पताल भवन में कभी पुलिस कैं, तो कभी प्रदर्शनी लगायी जाती है.

विकास भवन तैयार, उपयोग नहीं

थाना चौक के पास विकास भवन बन कर वर्षों से तैयार है, लेकिन वहां काम शुरू नहीं हो सका है. रख-रखाव के अभाव में यह भवन पुराना होता जा रहा है.

कृषि गोदाम

केंद्रीय विद्यालय पथ पर निर्माणाधीन कृषि गोदाम दो करोड़ दस लाख 28 हजार रुपये खर्च होने के बाद भी अधूरा है. इस काम का संवेदक सेठ कंस्ट्रक्शन नगर ऊंटारी है. उक्त कंपनी ने सरकार से 28 नवंबर तक काम पूरा होने का करार किया है, लेकिन अभी तक काम अधूरा है.

एएनएम हॉस्टल वर्षों से अधूरा

धर्मपुर मुहल्ले में ही लगभग 80 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन एएनएम हॉस्टल पिछले सात-आठ वर्षों से अधूरा पड़ा है. उक्त भवन के छज्जे जीर्ण हो गये हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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