लातेहारः राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी चिकित्सा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. गत गुरुवार को सदर प्रखंड के पांडेयपूरा ग्राम निवासी भोला साव की मां नेपो देवी पेट दर्द की शिकायत पर सदर अस्पताल पहुंची. चिकित्सा कर्मियों ने उन्हें अस्पताल में भरती किया. वह करीब चार घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी डॉक्टर ने उनकी सुध नहीं ली. परिजनों ने इसकी शिकायत सिविल सजर्न डॉ कन्हैया प्रसाद से की.
जब उनका इलाज शुरू किया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. नेपो देवी दम तोड़ चुकी थीं. शुक्रवार को सरयू पंचायत के मुरपा गांव निवासी मुनिया कुमारी को पेट दर्द की शिकायत पर सदर अस्पताल लाया गया. वह भी दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी चिकित्सक ने उसकी सुध नहीं ली और उसकी मौत हो गयी. गौरतलब है कि अस्पताल को सदर अस्पताल का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन यहां रेफरल अस्पताल जैसी सुविधा भी नहीं है. सिविल सजर्न एनआरएचएम के तहत ली जानेवाली योजनाओं के प्रबंधन एवं विपत्रों के भुगतान में ही व्यस्त रहते हैं. अधिकांश समय एनआरएचएम में ही देने के कारण चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने का मूल कार्य बाधित हो रहा है.
