झुमरीतिलैया से सुजल भदानी की रिपोर्ट
कोडरमा जैसे छोटे जिले में अत्याधुनिक महिला चिकित्सा सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है. सामंतो काली मंदिर के समीप स्थित शीला रानी हॉस्पिटल एवं बांझपन सेंटर की गोल्ड मेडलिस्ट गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. अलंकृता मंडल सिन्हा ने एक जटिल हाई रिस्क प्रेगनेंसी केस का सफलतापूर्वक उपचार कर महिला को सिजेरियन ऑपरेशन से बचाने में सफलता हासिल की.
दरअसल कोडरमा की रहने वाली एक महिला के गर्भ में करीब तीन महीने का असामान्य भ्रूण था. चिकित्सकीय सलाह के अनुसार गर्भसमापन यानी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी जरूरी था. कई जगह जांच कराने पर महिला के गर्भाशय में एक सेप्टम यानी दीवार होने की जानकारी सामने आई.
कई चिकित्सकों ने दी थी सिजेरियन की सलाह
एमटीपी को लेकर कई चिकित्सकों ने मरीज को सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी थी. लेकिन महिला मरीज सिजेरियन के लिए तैयार नहीं थी. महिला ने सामान्य प्रक्रिया से एमटीपी कराने के लिए कोडरमा के अलावा धनबाद और रांची में भी कई महिला चिकित्सकों से परामर्श लिया. लेकिन हर जगह उन्हें सिजेरियन को ही विकल्प बताया गया.
काफी निराश होकर जब वह वापस कोडरमा लौट रही थी. तब महिला ने मोबाइल पर हाई रिस्क प्रेगनेंसी के इलाज की सुविधा तलाशनी शुरू की. गूगल सर्च के दौरान उन्हें झुमरी तिलैया में शीला रानी हॉस्पिटल की जानकारी मिली. इसके बाद वह अपने पति और परिजनों के साथ अस्पताल पहुंची और डॉ. अलंकृता मंडल से परामर्श लिया.
हिस्ट्रोस्कोपी से हटायी गयी असामान्य दीवार
डॉ. अलंकृता ने जांच के बाद मरीज की स्थिति और उसके भविष्य को ध्यान में रखते हुए हिस्ट्रोस्कोपी के माध्यम से वेजाइनल सेप्टम सर्जरी करने का निर्णय लिया. इस प्रक्रिया में गर्भाशय और वजाइना के बीच मौजूद असामान्य दीवार को दूरबीन की सहायता से हटाया गया. जिसके बाद एमटीपी की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई.
मरीज ने बताया कि वह सिजेरियन के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी और कई जगह से सलाह लेने के बाद काफी परेशान हो चुकी थी. उसके अनुसार शीला रानी हॉस्पिटल में केवल ऑपरेशन करने पर ध्यान नहीं दिया गय. बल्कि उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता दी गई.
मरीज ने कहा कि इलाज के दौरान डॉ. अलंकृता ने डॉक्टर के साथ-साथ मां और बड़ी बहन की तरह उसका हौसला बढ़ाया. आज वह स्वस्थ है और उसे किसी तरह का दर्द या परेशानी नहीं है.
2018 से कोडरमा में हिस्ट्रोस्कोपी की सुविधा
डॉ. अलंकृता मंडल ने बताया कि जांच में मरीज के गर्भाशय में दीवार पाई गई थी. जिसके कारण सामान्य प्रक्रिया से एमटीपी संभव नहीं था. हिस्ट्रोस्कोपी के माध्यम से उस दीवार को हटाकर उपचार को सुरक्षित तरीके से पूरा किया गया.
उन्होंने बताया कि कोडरमा में उन्होंने वर्ष 2018 में हिस्ट्रोस्कोपी की सुविधा शुरू की थी. शुरुआती दौर में संसाधनों और मेडिकल स्टाफ की कमी थी. लेकिन लगातार ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट के साथ सुविधाओं को मजबूत किया गया.
उनका उद्देश्य है कि जटिल महिला रोगों के इलाज के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से रांची, धनबाद या दूसरे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े.
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बड़े शहरों के मुकाबले कम खर्च में सुविधा देने का प्रयास
डॉ. अलंकृता ने बताया कि बड़े शहरों में हिस्ट्रोस्कोपी पर लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक खर्च हो सकता है. जबकि कोडरमा में इसे करीब 20 से 25 हजार रुपये में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है.
हिस्टेरोस्कोपी के जरिए गर्भाशय और वजाइना में मौजूद असामान्य दीवार, झिल्ली, गांठ या अन्य समस्याओं की पहचान और उपचार किया जा सकता है. कई मामलों में यह महिलाओं को अनावश्यक रूप से बच्चेदानी निकालने की सर्जरी से बचाने में भी मददगार होती है. सामान्य परिस्थितियों में मरीज को करीब एक से डेढ़ दिन में अस्पताल से छुट्टी दी जाती है.
आईयूआई से आईवीएफ और लैप्रोस्कोपी तक सुविधा
उन्होंने बताया कि शीला रानी हॉस्पिटल में महिला स्वास्थ्य और बांझपन से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं के तहत आईयूआई, हिस्टेरोस्कोपी, टीवीएस अल्ट्रासाउंड, आईवीएफ और लैप्रोस्कोपी जैसी सेवाएं है.
उनका प्रयास है कि अत्याधुनिक महिला चिकित्सा सुविधाएं कोडरमा जैसे छोटे जिले में ही मरीजों को उपलब्ध कराई जा सकें.
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