प्रतिनिधि, कोडरमा निकाय चुनाव की डुगडुगी बजने के साथ एक बार फिर विकास के दावों की बौछार होगी, पर चुनाव के बाद तस्वीर काफी अलग दिखती है. कहने को तो झुमरीतिलैया नगर परिषद क्षेत्र है, लेकिन यहां की स्थिति आये दिन खराब होते जा रही है. शहर की कई ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान आज तक नहीं हो पाया है, पर शहरी विकास के नाम पर अलग से जो समस्या खड़ी की जा रही है उसका भी समाधान पदाधिकारी निकाल नहीं पाते. ऐसे में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी तरह की समस्या है शहर की अधिकतर सड़कों को पाइप लाइन बिछाने के नाम पर चीर देने व बाद में इसे यूं ही छोड़ देने का. सड़कों को जहां-तहां काट कर आधा अधूरा पाइप लाइन डाल ऐसे छोड़ दिया जा रहा है कि स्थानीय लोगों का आवागमन तक मुश्किल हो रहा है. जानकारी के अनुसार शहर की सड़कों को चीरकर बिछायी गयी पाइपलाइन, अधूरे गड्ढे, टूटी नालियां और हर पल मंडराता हादसे का खतरा आज शहर की सबसे गंभीर समस्या बन चुकी है. सड़कें चिरीं, पाइप डाली और यूं ही छोड़ दी गयीं. गड्ढे खोदकर पाइप डाल दी गयी और रोड को वैसे ही छोड़ दिया शहर में जलापूर्ति योजना के तहत सड़कों को करीब तीन फीट तक खोदकर पाइप बिछाई जानी थी. नियम साफ था कि पाइप डालने के बाद सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जायेगा, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. शहर के कई इलाकों में गड्ढे खोदकर पाइप डाल दी गई और सड़क को उसी हाल में छोड़ दिया गया. कहीं आधा काम, कहीं अधूरी मरम्मत और कहीं सिर्फ मिट्टी डालकर जिम्मेदारी खत्म कर दी गई है. भुगतना लोगों को पड़ रहा है. कई मोहल्लों में लोगों ने मजबूरी में अपनी जेब से पैसा खर्च कर गड्ढे भरवाये, फिर भी आधी टूटी सड़क जानलेवा बने हुए हैं. हर दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. जुडको नहीं सुन रहा किसी की बात इस पूरे कार्य की जिम्मेदारी जुडको को सौंपी गयी थी. नगर विकास विभाग के अंतर्गत जिला स्तर पर समीक्षा भी हो रही है, लेकिन स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि जुडको किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है. शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं. 159 करोड़ की योजना, 197 किलोमीटर का काम शहर के अंदर कुल 197 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप लाइन का कार्य होना है, जिसकी लागत लगभग 159 करोड़ रुपये बतायी जा रही है. यह कार्य मार्च 2026 तक पूरा होना है. जल शोधन संयंत्र के लिए जमीन देर से मिलने के कारण कार्य में कुछ विलंब की बात कही जा रही है. अब तक करीब 100 किलोमीटर में काम पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन सड़क और नाली की हालत इस दावे पर सवाल खड़े कर रही है. Bजनता की मांग: जैसा था, वैसा बनाओ नगर परिषद चुनाव के बीच यह समस्या आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल है. विकास के नाम पर शहर को खोद देना और उसे पहले जैसी स्थिति में न लौटाना, जनता के धैर्य की परीक्षा ले रहा है. लोग अब यही पूछ रहे हैं उन्हें साफ पानी के साथ सुरक्षित सड़कें भी मिलेंगी, या हर चुनाव की तरह यह मुद्दा भी वादों में ही दब जायेगा? शहरवासियों की एक ही मांग है जहां सड़क खोदी गयी है, वहां उसे पहले जैसी मजबूत और सुरक्षित स्थिति में बहाल किया जाये. अधूरी पाइपलाइन, टूटे नाले और खुले गड्ढे न सिर्फ परेशानी हैं, बल्कि जानलेवा भी हैं.
विकास के नाम पर चीर दी सड़कें, फिर यूं ही दिया छोड़
निकाय चुनाव की डुगडुगी बजने के साथ एक बार फिर विकास के दावों की बौछार होगी, पर चुनाव के बाद तस्वीर काफी अलग दिखती है.
