विकास और आत्मनिर्भरता की ओर ऐतिहासिक कदम है यह शुरुआत : अन्नपूर्णा———————–
वरीय संवादाता,कोडरमा
कोडरमा जिला व इसके आसपास के क्षेत्रों में दुर्लभ खनिजों की खोज की जा रही है. परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन परमाणु खनिज निदेशालय द्वारा जी-4 स्तर का भूगर्भीय एवं रेडियोमैट्रिक सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें रेयर अर्थ मिनरल्स सहित अन्य महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है. उक्त जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी. डॉ. जितेंद्र के अनुसार रेयर अर्थ का महत्व दुनिया भर में बढ़ रहा है, पर ये भी सच है कि गत 10-11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद पहली बार इस सेक्टर को प्राथमिकता दी जा रही है. इधर, केंद्र सरकार के स्तर से कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के लिए हो रहे इस प्रयास पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सह कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी ने हर्ष जताया है. अन्नपूर्णा ने बयान जारी कर कहा है कि कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में दुर्लभ एवं रणनीतिक खनिजों की संभावनाओं को लेकर बड़े पैमाने पर भूगर्भीय सर्वे का प्रारंभ होना महत्वपूर्ण और उत्साहजनक कदम है. वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में रेयर अर्थ मिनरल्स का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है. इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों च उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में इन खनिजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. यदि सर्वे में इन खनिजों की उपस्थिति प्रमाणित होती है, तो यह कोडरमा और देश दोनों के औद्योगिक एवं रणनीतिक विकास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि सिद्ध होगी. अन्नपूर्ण ने आगे कहा कि इससे क्षेत्र में उद्योग, निवेश एवं स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं, जिससे कोडरमा के समग्र विकास को नई गति मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में कोडरमा की संभावित खनिज संपदा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं पर्यावरण-संतुलित प्रक्रिया के माध्यम से इस प्राकृतिक संपदा को विकास और समृद्धि में परिवर्तित किया जाएगा, साथ ही स्थानीय समुदायों के हितों की भी पूर्ण रक्षा की जाएगी.
अभ्रक नगरी के रूप में कोडरमा की रही है पहचान, कई कीमती पत्थर हैं मौजूदबता दें कि कोडरमा की पहचान एक समय में अभ्रक नगरी के रूप में रही है. विश्व प्रसिद्ध रूबी माइका सिर्फ कोडरमा में पाया जाता था. हालांकि, नया वन संरक्षण अधिनियम के आने व कठोर नियम कानून की वजह से गत कई वर्षों से एक भी अभ्रक की खदान यहां वैध रूप से संचालित है. इससे अलग कोडरमा में कुछ जगहों पर अभ्रक के अंश ढिबरा का कारोबार अवैध रूप से चलता है, जबकि कोडरमा की धरती में पत्थरों की उपलब्धता से यहां खदानें भी संचालित हैं. वर्तमान में सिर्फ ब्लैक स्टोन का कारोबार नियमानुसार होता है, जबकि कोडरमा जिले में अन्य कई कीमती पत्थरों का खनन किए जाने की बात भी सामने आती रही है. इसमें ब्लू स्टोन, सफेद पत्थर फेलेस्फार क्वार्टज व ग्रीन पत्थर आदि शामिल हैं. ये पत्थर कई बार प्रशासनिक छापामारी में बरामद हो चुके हैं. वहीं कोडरमा में गत वर्ष लिथियम का अंश भी पाए जाने की चर्चा सामने आ चुकी है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है.
