रेलवे हमारे अस्तित्व का ख्याल रखे, नहीं तो आंदोलन

कॉरिडोर के निर्माण को लेकर रेलवे की ओर से की जानेवाली घेराबंदी से बाजार का अस्तित्व खतरे में है.

जयनगर. धनबाद गया रेलखंड पर स्थित हीरोडीह स्टेशन के समीप वर्षों से बाजार, दुकान और दर्जनों गांव की यातायात व्यवस्था संचालित है, लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण को लेकर रेलवे की ओर से की जानेवाली घेराबंदी से बाजार का अस्तित्व खतरे में है. लोगों के अनुसार यहां घेराबंदी हुई तो, बाजार और दुकानों के साथ-साथ साप्ताहिक हाट भी समाप्त हो जायेगी. साथ ही नेताजी उद्यान और वहां लगी उनकी अदमकद प्रतिमा भी घेराबंदी के अंदर हो जायेगी. दुकान हटाने से कई लोग स्वत: बेरोजगार हो जायेंगे. कटहाडीह, हिरोडीह, कंद्रपडीह, करियांवा इन चार पंचायत के दर्जनों गांव के लोगों का हीरोडीह स्टेशन और बाजार आना-जाना मुश्किल हो जायेगा. यहां आने से पहले उन्हें कंद्रपडीह सिरो फाटक के पास बने अंडरपास तक आना पड़ेगा, ऐसे में दुकानदारों व स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है़ रेलवे की घेराबंदी का लगातार विरोध हो रहा है. इस समस्या पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है. वर्जन::: हीरोडीह बाजार में दूसरे पंचायत के लोग भी खरीदारी करने आते हैं, मगर रेलवे ने जमीन छोड़े बगैर घेराबंदी की, तो सब कुछ बदल जायेगा. जमीन बचाने को लेकर कई बार सांसद-विधायक से पंचायत के लोगों ने गुहार लगायी है. कई बार डीआरएम को ज्ञापन दिया गया है. संगीता देवी, मुखिया हीरोडीह पंचायत जमीन बचाने को लेकर कई बार सांसद व विधायक से मिला, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला. यदि निराकरण नहीं हुआ, तो दर्जनों गांव के लोग तबाह हो जायेंगे. यह बाजार वर्षों पुराना बाजार है. जनहित मेंं बाजार का बचना जरूरी है. यमुना यादव, तेतरियाडीह हम सभी दुर्गा पूजा का मेला देखने और मंगलवार को हाट में खरीदारी करने समेत बैंकिंग कार्यों के लिए हीरोडीह जाते हैं. मगर घेराबंदी के बाद हाट और हीरोडीह बाजार जाना बंद हो जायेगा. क्षेत्र का विकास हो, लेकिन रेल प्रशासन जनहित का भी ख्याल रखे. रंजीत यादव, सुगाशांख बाप दादा के जमाने से परिवार का भरण पोषण करते आ रहे हैं. अब बुलेट ट्रेन चलाने के लिए की जा रही घेराबंदी से दुकान और दुकानदारी दोनों चौपट हो जायेगा. बाजार लगने के लिए रेलवे जमीन छोड़े, नहीं तो दुकानदार आंदोलन को बाध्य होंगे. मुरलीधर यादव, रेभनाडीह घेराबंदी से हाट बाजार बंद हो जायेगा, तो हर चीज के लिए झुमरी तिलैया जाना होगा. इससे हम सभी की परेशानी बढ़ेगी. समय और पैसे की बर्बादी होगी. रेलवे बाजार के लिए जमीन छोड़े. ऐसा नहीं हुआ तो दर्जनों गांव के लोगों की परेशानी बढ़ेगी. अवित सिंह, युवा व्यवसायी घंघरी बचपन हिरोडीह बाजार में बीता है. चौक पर पिताजी दुकान चलाते हैं. यहां आसपास के ग्रामीण खरीदारी करने आते हैं, ऐसे में यदि रेलवे ने घेराबंदी से पहले जमीन नहीं छोड़ी, तो दुकान तो शायद बच जाये, पर दुकानदारी मुश्किल हो जायेगी. विवेक यादव, युवा व्यवसायी तेतरियाडीह

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Author: ANUJ SINGH

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