मारवाड़ी समाज की अनूठी परंपरा, होली पर नहीं जलता चूल्हा

होली के आठ दिन बाद शीतला माता की पूजा की जाती है

झुमरीतिलैया. रंगों के पर्व होली पर जहां अधिकतर घरों में तरह-तरह के व्यंजन बनते हैं, वहीं मारवाड़ी समाज में इस दिन एक अलग ही परंपरा निभायी जाती है. होलिका दहन के बाद होली के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता. इतना ही नहीं, अगले आठ दिनों तक घरों में तले-भुने पकवान नहीं बनाये जाते और ठंडा या पहले से तैयार भोजन ही ग्रहण किया जाता है. इस अवधि में केवल सादा भोजन बनाया जाता है. समाज के लोगों के अनुसार, यह परंपरा शीतला माता की पूजा से जुड़ी है. होली के आठ दिन बाद शीतला माता की पूजा की जाती है, तब तक घरों में नये कपड़े न तो खरीदे जाते हैं और न ही पहने जाते हैं. पूजा के दिन भी चूल्हा नहीं जलता और बासी या ठंडा भोजन ही ग्रहण किया जाता है. पिंकी खेतान बताती हैं कि इस परंपरा के पीछे एक लोककथा प्रचलित है. मान्यता है कि एक गांव में होली के दिन भीषण आग लग गयी थी, जिसमें पूरा गांव जल गया, लेकिन एक वृद्धा का घर सुरक्षित बच गया. वृद्धा ने बताया कि वह शीतला माता की पूजा करती थीं, तभी से इस परंपरा की शुरुआत मानी जाती है. चारूलता चौधरी के अनुसार, अलग-अलग परिवारों में इस परंपरा के पालन में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन अधिकतर घरों में होलिका दहन के दिन ही पकवान तैयार कर लिये जाते हैं और शीतला माता की पूजा तक वही ठंडा भोजन खाया जाता है. ज्योति परसरामपुरिया बताती हैं कि शीतला माता की पूजा मंदिर में की जाती है, इस अवधि में बीमार और बुजुर्गों को परंपरा से छूट दी जाती है, परंपरा का पालन करते हुए समाज के लोग पूरे उत्साह के साथ होली मनाते हैं, लेकिन नियमों का भी सख्ती से पालन करते हैं.

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By DEEPESH KUMAR

DEEPESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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