55 प्रतिशत काम पूरा, तो डिजाइन पर उठा सवाल

जिले का बहुप्रतीक्षित व ड्रीम प्रोजेक्ट करमा मेडिकल कॉलेज का निर्माण एक बार फिर सवालों के घेरे में है़

वरीय संवाददाता,

कोडरमा. जिले का बहुप्रतीक्षित व ड्रीम प्रोजेक्ट करमा मेडिकल कॉलेज का निर्माण एक बार फिर सवालों के घेरे में है़ ऐसे समय में जब मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर तय की गयी अवधि को दो बार विस्तार दिया जा चुका है और वर्तमान में 55 प्रतिशत तक काम पूर्ण हुआ है तो अब कॉलेज निर्माण के मूल डिजाइन व अन्य बिंदुओं पर ही सवाल उठ गया है़ ऐसे में आशंका जतायी जा रही है कि अब कॉलेज का निर्माण पूरा होने में और देरी हो सकती है़ मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का शिलान्यास होने से लेकर अब तक जो स्थितियां बनी हैं उससे सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान लगा है़ सबसे बड़ा सवाल इस बात का है जिन बिंदुओं को अब सामने लाकर सुधार का निर्देश दिया जा रहा है उस पर काफी पहले काम होना चाहिए था़ अब चूंकि स्ट्रक्चर निर्माण का कार्य करीब-करीब पूरा हो चुका है.

लेट के कारण सिम्पलेक्स इंफ्रा प्रा. लि. को ब्लैक लिस्टेड कर दिया था

गत दिन कोडरमा दौरे पर आये झारखंड के स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अगले वित्तीय वर्ष से यहां 50 सीट में नामांकन से लेकर पढ़ाई शुरू करने की संभावना जतायी है़ जानकारी के अनुसार 69.84 एकड़ जमीन में से प्रथम फेज में 30 एकड़ में करमा मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का शिलान्यास 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन किया था. उस समय 100 सीट वाले मेडिकल कॉलेज व 200 बेड के सदर अस्पताल के अपग्रेडेशन का कार्य सिम्पलेक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था. संबंधित कंपनी को 328 करोड़ रुपये में इस परियोजना को जनवरी 2022 में पूरा करना था, पर कुछ अड़चनों व कंपनी की लापरवाही की वजह से मात्र 13 फीसदी कार्य पूर्ण हो सका था. लेटलतीफी की वजह से सिम्पलेक्स इंफ्रा प्रा. लि. को सरकार ने ब्लैक लिस्टेड कर दिया, जबकि नए स्तर पर टेंडर प्रक्रिया कर मुंबई की कंपनी वेस्कॉन इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को काम दिया गया. नई कंपनी को करीब 353 करोड़ रुपये में कार्य पूरा करने का लक्ष्य मई 2026 दिया गया है, पर इसे बढ़ा दिया गया है़ इस कंपनी ने अप्रैल 2024 में काम शुरू किया. इसके बाद धरातल पर काम दिखने लगा. अब तक अधिकतर स्ट्रक्चर का काम हो गया है, जबकि अन्य कार्य प्रगति पर है. इस बीच गत दिन स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव कोडरमा दौरे पर आये. उन्होंने मेडिकल कॉलेज निर्माण का जायजा लिया़ इस दौरान कॉलेज निर्माण में कई खामियों पर उन्होंने सवाल उठाया और सुधार के निर्देश दिये. यही नहीं उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को फटकार लगाते हुए डिजाइन तक पर सवाल उठा दिया़ हालांकि, विभागीय अधिकारी पूर्व में स्वीकृत डिजाइन पर ही काम करने का हवाला देते रहे़

आठ साल पहले स्वीकृत हुआ था डीपीआर

बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेज निर्माण को लेकर पहल तत्कालीन भाजपा नीत रघुवर दास की सरकार में हुई थी़ वर्ष 2018 में इसको लेकर बनाये गये डीपीआर जिसमें डिजाइन से लेकर जमीन हस्तांतरण तक का जिक्र था को स्वीकृति दी गयी. वर्ष 2019 में कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ़ उस समय कार्य एजेंसी भवन निर्माण निगम लिमिटेड के कार्यपालक अभियंता वीरेंद्र बहादुर थे़ तत्कालीन इइ ने कार्य शुरू कराया़ इसके बाद वर्ष 2021 में कार्यपालक अभियंता अमित कुमार बने़ कोरोना काल में कार्य धीमा हुआ, जबकि पहली कंपनी की लापरवाही से भी विलंब हुआ़ बाद में दूसरी कंपनी ने काम शुरू किया़ विभागीय जानकार बताते हैं कि बड़ी परियोजना को लेकर हर माह प्रगति प्रतिवेदेन रिपोर्ट सौंपी जाती है, जबकि कई बार निर्माण कार्य का जायजा लिया जा चुका है, लेकिन मूल डिजाइन पर ही सवाल उठना गंभीर बात है़ वह भी तब जब स्ट्रक्चर निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका हो़ जानकार यह भी बताते हैं कि किसी भी बड़ी परियोजना के डिजाइन बनाने से लेकर अन्य मामलों में परियोजना प्रबंधन परामर्शी की भूमिका अहम होती है़ इसको लेकर कहीं कोई बात नहीं है.

तीन करोड़ भुगतान के बाद ध्यान आया, क्रिटिकल केयर ब्लॉक यहां नहीं बनना चाहिए

इधर, गत दिन स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के दौरे के क्रम में अधिकारियों की लापरवाही का एक और मामला सामने आया़ करमा मेडिकल कॉलेज के सामने बनाए जा रहे 30 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक को लेकर अपर मुख्य सचिव ने सवाल उठाया़ उन्होंने कहा कि इसका यहां पर निर्माण कराने का क्या औचित्य है़ इसे तो सदर अस्पताल के पास बनाया जाना चाहिए था़ सचिव के निर्देश के बाद हर कोई हैरान है, पर जानकारी सामने आयी है कि सीसीबी के निर्माण को लेकर संबंधित संवेदक को करीब तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है़ कार्य चल रहा था, पर अब जगह परिवर्तन की बात आ गयी है़

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Published by: Vikash nath

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