लोगों को पढ़ायागया धर्म का ज्ञान
झुमरीतिलैया : जैन धर्म के महापर्व दशलक्षण पर्व का आठवा दिन उत्तम त्याग धर्म के रूप में मनाया गया. जैन मंदिर के सरस्वती भवन के सभागार में परम विदुषी साधना दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि त्याग के बिना कोई भी धर्म जीवित नहीं रह सकता.
धर्म व आत्मा को जीवित रखने के लिए त्याग आवश्यक है, जो व्यक्ति भगवान के मंदिर और उसके जीर्णोद्धार में अपनी चंचल लक्ष्मी का उपयोग करता है उसके पास कभी भी लक्ष्मी की कमी नहीं होती है और वह हमेशा सुखी रहता है. साथ ही तरक्की करता है. जैन धर्म में आज उत्तम त्याग का दिन है. आज प्रत्येक व्यक्ति को अपनी चंचल लक्ष्मी का त्याग दान देकर कुछ न कुछ रूप में अवश्य करना चाहिए. अपने जीवन से बुराइयों का त्याग ही उत्तम त्याग धर्म है. हमें अपने बच्चों को हमेशा संस्कारवान बनाना चाहिए.
वहीं शांति धारा करने का अवसर मनोज कुमार, आदित्य, चूड़ी वाल, सुरेंद्र, शैलेश छाबड़ा, रतनलाल, राकेश, आदित्य छाबड़ा, अशोक, साकेत सरावगी, सुरेश, नरेंद्र झांझरी, नया मंदिर में श्री लादू लाल धर्म चंद छाबड़ा, मुकेश व विशेष शांतिधारा करने का अवसर जैन युवक समिति के अध्यक्ष राजीव छाबड़ा और मंत्री सुमित सेठी व सदस्यों को मिला. संध्या में महाआरती में सुबोध गंगवाल ने अपने भजनों से लोगों को झूमने पर मजबूर किया.
रात्रि में पंडित अभिषेक शास्त्री ने लोगों को धर्म का ज्ञान पढ़ाया और स्वाध्याय किया. साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा भजन प्रतियोगिता आयोजित की गयी़ जिसमें 15 वर्ष के बच्चों से लेकर 70 वर्ष तक के लोगों ने भाग लिया़ विजेता प्रतियोगी को समाज के अध्यक्ष ने पुरस्कृत किया. इस कार्यक्रम के परियोजना निदेशक संजय ठोल्या, निर्णायक सुबोध गंगवाल व मुकेश पांड्या थे. मंगलाचरण आरुषि बाकलीवाल व रिधि ठोल्या ने किया. मौके पर जैन समाज के अध्यक्ष, मंत्री, जैन महिला समाज की अध्यक्ष, मंत्री, जैन युवक समिति के सभी सदस्य, पार्षद पिंकी जैन, मीडिया प्रभारी राजकुमार अजमेरा, नवीन जैन आदि मौजूद थे.
