जैन मुनि का नगर में हुआ मंगल प्रवेश

झुमरीतिलैया : जैन समाज के परम पूज्य आचार्य श्री 108 शीतलसागर जी महाराज का 25 जून को तीर्थराज सम्मेद शिखर से मंगल विहार करते हुए एक जुलाई को झुमरीतिलैया पहुंचे. इनके शहर में मंगल प्रवेश करने पर जैन समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया. आचार्य शीतलसागर जी महाराज का शहर के मुख्य द्वार पर […]

झुमरीतिलैया : जैन समाज के परम पूज्य आचार्य श्री 108 शीतलसागर जी महाराज का 25 जून को तीर्थराज सम्मेद शिखर से मंगल विहार करते हुए एक जुलाई को झुमरीतिलैया पहुंचे. इनके शहर में मंगल प्रवेश करने पर जैन समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया. आचार्य शीतलसागर जी महाराज का शहर के मुख्य द्वार पर समाज के अध्यक्ष बिमल बड़जात्या, उपाध्यक्ष कमल सेठी, मंत्री विजय सेठी, सहायक मंत्री राज छाबड़ा, ललित सेठी, सरोज पापडीवाल, सुरेंद काला के साथ सैकड़ों लोगों ने उपस्थित होकर आचार्य श्री का स्वागत किया.
शहर में प्रवेश कर नगर भ्रमण करते हुए मुनिश्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचे. पूरे रास्ते में जगह-जगह पाद प्रक्षालन एवं आरती उतारी गयी. मंदिर पहुंचने पर जैन महिला संगठन अध्यक्ष नीलम सेठी, आशा गंगवाल, रीता सेठी, ममता सेठी, रिंकू गंगवाल, मोना छाबडा, बबिता गंगवाल आदि महिलाओं ने भी मुनीश्री की आरती उतारी और उनका स्वागत किया.
मंदिर पहुंचने पर सर्वप्रथम 1008 पारस नाथ भगवान का मस्तिकाभिषेक के साथ आचार्य श्री के मुखारविंद से शांतिधारा की गयी. सुबोध गंगवाल द्वारा मंगला चरण किया गया. मुनीश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि नमस्कार में भक्ति हो तो चमत्कार स्वयं होते हैं. उनका आगमन भक्ति जगाने के लिए नहीं, अपितु भगवान बनाने के लिए हुआ है. उन्होंने आगे बताया कि व्यक्ति कपड़े से, धन दौलत से श्रेष्ठ नहीं होता, सम्यक दर्शन से बड़ा होता है, उच्चारण से बड़ा नहीं होता, उच्च आचरण से बड़ा होता है.

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