महीउद्दीन ने बंजर भूमि पर की सब्जी की खेती

जयनगर : कौन कहता है कि पत्थर पर फूल नहीं उग सकते. यदि इरादा मजबूत और परिश्रम का माद्दा हो, तो पत्थर पर भी फूल उगाये जा सकते हैं. इस कथन को साबित कर दिखाया है बिसोडीह निवासी महीउद्दीन अंसारी ने. महीउद्दीन ने बंजर व एसपौंड की धूल उड़ती अपनी पांच कट्टा जमीन में जेठुआ […]

जयनगर : कौन कहता है कि पत्थर पर फूल नहीं उग सकते. यदि इरादा मजबूत और परिश्रम का माद्दा हो, तो पत्थर पर भी फूल उगाये जा सकते हैं. इस कथन को साबित कर दिखाया है बिसोडीह निवासी महीउद्दीन अंसारी ने. महीउद्दीन ने बंजर व एसपौंड की धूल उड़ती अपनी पांच कट्टा जमीन में जेठुआ सब्जी, भिंडी, कद्दू, करैला, चिंगी, नेनुआ आदि की खेती की है. इस खेत के बगल में लगभग ढाई कट्ठा जमीन में टमाटर की भी खेती की है. आज उसके खेत से जेठुआ सब्जी का बेहतर उत्पादन हो रहा है. उसे इस काम में उसकी बेगम व बेटा आबिद अंसारी पूरा सहयोग करते है.

महीउद्दीन की ताजी सब्जियां केटीपीएस बांझेडीह के स्टाफ कॉलोनी में घंटे-दो घंटे में बिक जाती है. इससे उन्हें 200-300 रुपये प्रतिदिन बगैर बाजार जाये लाभ होता है. उसने बताया कि इस फसल को लगाने से तैयार होने तक पांच हजार की पूंजी लगी है. खेतों में पानी पहुंचाने की समस्या से जूझते हुए उसने अपने अथक प्रयास से यह सफलता अर्जित की है. फिलहाल वह अपने उस खेत मे बने 12 फीट व्यास के कूप से पानी का पटवन करता है. इस खेत में पहले व सब्जियां लगाया करता था.
उस कूप की दूरी अभी लगी सब्जियों की खेत से लगभग 450 फीट है, जहां से पाइप से वह पानी लाकर पटवन करते हैं. उसकी इस सफलता को देखते हुए आसपास के कई किसानों ने सब्जियों की खेती शुरू की है. हालांकि उन्हें भी दूर से पानी लाना पड़ता है. एक वर्ष पूर्व महीउद्दीन कूप स्थल पर सब्जियों की खेती करता था, मगर इस दौरान केटीपीएस द्वारा छोड़े गये दूषित पानी से उनकी खेत के साथ साथ अन्य खेत भी खेती लायक नहीं रहे. तब उसने स्थल परिवर्तन कर खेती शुरू की. हालांकि उस समय डीवीसी प्रबंधन ने मुआवजा देने की बात कही थी. एक वर्ष बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है. महीउद्दीन समेत बिसोडीह के दर्जनों किसानों ने उपायुक्त कोडरमा को ज्ञापन देकर एक वर्ष पूर्व हुई फसल की क्षति पूर्ति के मुआवजा की मांग की है.
पानी की कमी व धूल से है परेशान
महीउद्दीन ने बताया कि खेती का दायरा बढ़ाया जा सकता है. मगर उसके लिए सरकारी सहायता जरूरी है. उन्होंने बताया कि सबसे मुख्य समस्या पटवन की है. पटवन के अभाव में काफी जमीन बंजर पड़ी है. दूसरी बड़ी समस्या बांझेडीह प्लांट के एसपौंड से उड़ने वाली धूल है. इससे सब्जियों के हर पौधे व हर सब्जियां काली हो जाती है. धूल धोने के बाद सब्जियां अपने वास्तविक रंग में आती हैं. प्रदूषण से उत्पादन भी प्रभावित होता है.

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