गैर पारंपरिक सभाओं को मान्यता देने का होगा विरोध : भीम सिंह मुंडा

अखिल भारतीय सरना समाज के अध्यक्ष भीम सिंह मुंडा और अन्य नेताओं ने शनिवार को विरोध दर्ज किया.

खूंटी. पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (पेसा) 1996 में राज्य सरकार द्वारा हाल ही में किये गये संशोधन और जारी अधिसूचना को लेकर अखिल भारतीय सरना समाज के अध्यक्ष भीम सिंह मुंडा और अन्य नेताओं ने शनिवार को नगर पंचायत अध्यक्ष रानी टुटी के आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर विरोध दर्ज किया. अध्यक्ष भीम सिंह मुंडा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में शासन व्यवस्था पारंपरिक आदिवासी व्यवस्था के अनुसार ही संचालित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि गैर-पारंपरिक ग्राम सभाओं को मान्यता दी जाती है, तो समाज इसका पुरजोर विरोध किया जायेगा. केवल पारंपरिक प्रणाली को ही मान्यता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान, पाहन और पड़हा राजा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जुड़े पद हैं. उनके अनुसार धर्मांतरण कर चुके आदिवासी इन पदों की धार्मिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकते. विशेष रूप से पाहन (पुजारी) जैसे पदों पर धर्मांतरित व्यक्तियों की नियुक्ति पारंपरिक आस्था के लिए नुकसानदायक है. ग्राम सभा को केवल प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. बल्कि यह एक पारंपरिक, सामाजिक और धार्मिक संस्था है, जिसकी मूल संरचना को बनाए रखना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि धर्मांतरित आदिवासी एक साथ दोहरा लाभ उठा रहे हैं. इससे पारंपरिक सरना आस्था को मानने वाले आदिवासी पीछे छूटते जा रहे हैं. पेसा अधिसूचना लागू होने के बाद इस स्थिति को स्वीकार नहीं किया जायेगा. उन्होंने ग्राम प्रधान शब्द के बदले हातू मुंडा नाम से संबोधित करने की मांग की. मौके पर समाज के सचिव लीलू पाहन, नगर पंचायत अध्यक्ष रानी टुटी, कोषाध्यक्ष नौरी पूर्ति, सदस्य बिरसा पाहन और नीरा हस्सा उपस्थित थे.

धर्मांतरित आदिवासी एक साथ दोहरा लाभ उठा रहे हैंB

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By CHANDAN KUMAR

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