बरसात के आते ही बाजार में बिकने लगी कुमनी

खूंटी जिले के बाजारों में मछली पकड़ने वाले परंपरागत औजार कुमनी की मांग बढ़ गयी है.

रनिया. खूंटी जिले के बाजारों में मछली पकड़ने वाले परंपरागत औजार कुमनी की मांग बढ़ गयी है. बरसात में कुमनी नामक मछली पकड़ने वाला बांस से बना उपकरण की बाजारों में खूब खरीदारी की जा रही है. यह उपकरण बारिश के मौसम में तालाब, खेत और नदियों में मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल होता है. ग्रामीण कुमनी को पानी के तेज बहाव में लगा देते हैं और मछलियां इसमें फंस जाती हैं. कई पीढ़ी से देसी जुगाड़ के रूप में ग्रामीण मछली पकड़ने के औजार के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे है. तोरपा प्रखंड के ओकड़ा गांव शिव महली, भोला नायक, सरजी नायक, बताते हैं कि एक कुमनी तैयार करने में उन्हें काफी समय लगता है. यह हमारी आजीविका से जुड़ा है. हमारे पुरखे भी यह काम करते थे और अब हम भी यह परंपरा निभा रहे हैं. कुमनी की कीमत बाजार में 300 रुपये से लेकर 350 के बीच है. ग्रामीण जीवन की झलक और पारंपरिक शिल्प का अद्भुत उदाहरण कुमनी न केवल मछली पकड़ने का औजार है, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत भी है.

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Published by: Chandan kumar

चंदन कुमार ने करियर की शुरुआत 1996 में प्रभात खबर से की. ऑल इंडिया रेडियो, सहारा समय टीवी, इंडिया टुडे एवं राष्ट्रीय सहारा में कार्य अनुभव. यात्रा वृतांत,साहित्य, सामाजिक बदलाव एवं कानूनी मामले की खबरों में रुचि. वर्तमान में मधेपुरा से खबरों का संकलन करते हैं.

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