खलारी : वन क्षेत्र के निकट रहनेवाले गांव की ग्रामसभा को अब जंगल बचाने के साथ-साथ जंगल के प्रबंधन का भी अधिकार मिलेगा. यह जानकारी शनिवार को करकट्टा बस्ती स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित तुमांग की ग्रामसभा में दी गयी.
झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन के संयोजक जेवियर कुजूर व बुढ़मू प्रखंड प्रभारी सूर्यमणि भगत ने ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम 2006 तथा नियमावली 2012 के बारे में जानकारी दी. साथ ही गांव से सटे जंगल को सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र घोषित किया गया.
इससे संबंधित एक बोर्ड भी जंगल में लगाया गया. जेवियर कुजूर ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत गांव के लोगों को जंगल व जीविका दोनों बचाने का अधिकार दिया गया. इसके आधार पर वन जनता की संपत्ति है लेकिन इसकी रक्षा भी जनता की जिम्मेवारी है.
इसके तहत जंगल बचाने व उपयोग के व्यक्तिगत व सामूहिक अधिकार दिये गये. व्यक्तिगत अधिकार के रूप में जो ग्रामीण वर्षों से वनभूमि पर रहते आ रहे थे उन्हें उस जमीन का पट्टा दिया गया. लेकिन अब सामूहिक अधिकार भी दिया जायेगा. इसके लिए दावा फॉर्म भर कर ग्रामसभा से पारित कराना होगा. इसके बाद एसडीओ के पास भेजना होगा. जांच के बाद जिला के उपायुक्त जंगल का पट्टा ग्रामसभा के नाम दे देंगे.
इसके बाद ग्रामसभा ही जंगल की रक्षा व प्रबंधन दोनों करेगी. जेवियर कुजूर ने बताया कि जंगल के प्रबंधन के लिए सामुदायिक वनपाल समिति गठित करनी होगी. इसमें ग्रामसभा के सदस्य होंगे. गांव में जिस किसी को भी लकड़ी या वन से मिलने वाली वस्तुओं का उपयोग करना है, तो पहले वनपाल समिति से अनुमति लेकर तथा ग्रामसभा में पारित करा कर वन सामग्री ले सकते हैं.
बैठक में प्रखंड प्रभारी विजय भगत, प्रखंड वनमित्र भुनेश्वर मुंडा, अलेक्ससुस टोप्पो, सहप्रभारी बाबूलाल गंझू, पंकज मुंडा, किशुन मुंडा, गणेश पाहन, सुभाष मुंडा, बहुरा मुंडा, जगेश्वर मुंडा, साधो मुंडा, सधन मुंडा, सुनील मुंडा, राकेश मुंडा, संतोष गंझू, भंगरू गंझू, सुनील मुंडा, सधवा देवी, यशोदा देवी, प्रमोद कुमार सिंह, आशा देवी, सपना देवी, सरस्वती देवी, बंधनी देवी सहित कई लोग उपस्थित थे.
