पिपरवार : इस भीषण गरमी में जल संकट से पूरा कोयलांचल परेशान है. कुआं, डोभा, तालाब से लेकर नदियों की धारा सूख चुकी है. ऐसे में कोती झरना का पानी वरदान साबित हो रहा है. बारहों महीने झरने से निकलने वाला साफ पानी हजारों लोगों की प्यास बुझा रहा है. वहीं लगभग पांच सौ एकड़ में लगी गरमा धान व सूर्यमुखी की फसल लहलहा रही है. किसान अपने बलबूते झरना के पानी को नाली के माध्यम से खेतों तक पहुंचा रहे हैं. आसपास के कई कुएं व तालाब उसी पानी की बदौलत वजूद बनाये हुए हैं.
बहती है अविरल जलधारा
पिपरवार कोयलांचल के सीमांत क्षेत्र में केरेडारी प्रखंड के बुंडू पंचायत में अवस्थित है खपिया गांव का कोती झरना. पिपरवार परियोजना खदान से लगभग 10 किमी दूर है. ग्रामीण बताते हैं कि कोती झरना का उद्गम स्थल धवैया व बतुरलता पहाड़ का परेवां खोह व निरजाखलार है.
यहां से कोती नदी का रूप ले लेती है अौर आगे जाकर दामोदर में मिल जाती है. ग्रामीण बताते हैं कि आसपास में ऐसे कई छोटे-छोटे झरने हैं. जिनसे लगभग 20 हार्स पावर वाले पंप के बराबर हमेशा पानी निकलता रहता है. इस पानी का सदुपयोग हो, तो पूरे कोयलांचल की प्यास बुझायी जा सकती है.
सरकार व सरकारी महकमा उदासीन
स्थानीय लोग वर्षों से इस नैसर्गिक उपहार के सदुपयोग को लेकर जन प्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं. लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला. ग्रामीण बताते हैं कि यदि झरना के पानी को सही ढंग से बांध बना कर संग्रहित कर दिया जाये, तो इलाके की पानी की समस्या दूर हो सकती है.
इसके अलावा हजारों एकड़ जमीन में सिंचाई की व्यवस्था हो सकती है. लेकिन सरकार व सरकारी महकमा इस दिशा में उदासीन हैं. हालांकि बड़कागांव के तत्कालीन विधायक लोकनाथ महतो के प्रयास से वहां आठ साल पहले एक चेकडैम बनवाया गया था, जिसमें बालू भर गया है.
