खलारी : करकट्टा में माइनिंग शुरू करने गयी बीपीआर माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मंगलवार को करकट्टा, खिलानधौड़ा के लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा.
विरोध के कारण कंपनी को अपनी मशीनें लौटानी पड़ी. ग्रामीणों का कहना था कि सीसीएल प्रबंधन जानबूझ कर टकराव की स्थिति बना रहा है. प्रबंधन विस्थापन का मुआवजा दिये बगैर माइनिंग शुरू कराना चाह रहा है. झामुमो नेता राजकिशोर राम पासवान का कहना था कि सीसीएल इस तरह का हालात पैदा कर देना चाह रही है कि ग्रामीण खदान से घिर कर स्वयं घर-जमीन छोड़ कर भाग जायें. वहीं ग्रामीणों ने कहा कि वे लोग कोल इंडिया के नियमों के अनुसार ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
आरएंडआर पॉलिसी के तहत मांग रहे हैं मुआवजा
सीसीएल की ओर से बीपीआर कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया है. लेकिन केडीएच खदान के विस्तारीकरण के लिए जिस जगह माइनिंग करना है वहां काफी संख्या में लोग बसे हुए हैं.
इनमें कुछ लोग वहां के रैयत हैं. वहीं कुछ ऐसे लोग हैं जिनका जमीन पर तो कागजी स्वामित्व नहीं हैं लेकिन वे सालों से वहां घर बना कर रह रहे हैं. कोल इंडिया ने ऐसे लोगों के लिए भी रिहैबिलीटेशन एंड रिसेट्लमेंट (आरएंडआर) पॉलिसी के तहत मुआवजे का प्रावधान बना रखा है.
सीसीएल के एनके एरिया में मुंडा धौड़ा, बत्तीस नंबर क्वार्टर, जेहलीटांड़ में इसी पॉलिसी के तहत मुआवजा दिया गया है. करकट्टा के लोग भी घर-जमीन छोड़ने के लिए इसी आधार पर मुआवजे की मांग कर रहे हैं. बीपीआर कंपनी को दो माह पूर्व भी अपनी मशीनें इसी तरह लौटानी पड़ी थी. उस दिन भी ग्रामीणों को विश्वास में लिये बगैर कंपनी माइनिंग करने करकट्टा पहुंच गयी थी.
