डकरा : भूमिगत कोयला खदान को अपग्रेड करने के लिए सीसीएल की अति महत्वकांक्षी और पायलट प्रोजेक्ट चूरी में लगभग 300 करोड़ का निवेश के बाद भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जिसके कारण कार्यरत कंपनी जॉय माइनिंग और सीसीएल प्रबंधन परेशान है. पायलट प्रोजेक्ट होने के कारण सीसीएल और कोल इंडिया प्रबंधन यहां हो रहे हर तरह की गतिविधि पर नजर बनाये हुए है और प्रतिदिन का अपडेट रिपोर्ट पर काम भी हो रहा है.
तकनीकी गड़बड़ी से परेशान हैं जॉय माइनिंग और सीसीएल के कर्मी
डकरा : भूमिगत कोयला खदान को अपग्रेड करने के लिए सीसीएल की अति महत्वकांक्षी और पायलट प्रोजेक्ट चूरी में लगभग 300 करोड़ का निवेश के बाद भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जिसके कारण कार्यरत कंपनी जॉय माइनिंग और सीसीएल प्रबंधन परेशान है. पायलट प्रोजेक्ट होने के कारण सीसीएल और कोल इंडिया प्रबंधन […]

24 मार्च से यहां कोयला निकलना शुरू हो गया है, लेकिन वोल्टेज की समस्या और कन्वेयर वेल्ट की तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरी क्षमता के साथ काम नहीं हो पा रहा है. वहीं ऊंचाई कम होने के कारण वहां 50-60 टन कोयला गिरते ही बंकर के मुंह तक कोयला जमा हो जाता है. जिसे हटाने की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी हो रही है.
यहां से कोयले की चोरी भी होने लगी है. महाप्रबंधक एमके राव ने कहा कि अगले सप्ताह नया ट्रांसफॉर्मर आने के बाद वोल्टेज की समस्या दूर हो जायेगी. लेकिन कुछ लोग अपनी निजी मांग (नौकरी व अन्य काम देने) को लेकर जॉय माइनिंग के अधिकारियों को धमका दे रहे हैं. जिससे कर्मी दहशत में हैं. कोल डंप की मांग को लेकर भी यहां रस्सा-कस्सी चल रही है.
समस्याओं को ठीक कर लिया जायेगा : महाप्रबंधक: महाप्रबंधक एमके राव ने कहा कि चूरी में जो भी समस्या है उस पर काम चल रहा है. जल्द ही वहां सब कुछ ठीक ठाक हो जायेगा. धमकी जैसे मामले भी गंभीर नहीं है. कुछ लोग अलग-अलग तरह का काम लेने के उद्देश्य से दबाव बनाने के लिए अगर कुछ कर रहे हैं तो उन्हें भी जल्द ही पता चल जायेगा कि वहां की कार्यप्रणाली का स्वरूप क्या है. कौन सा काम किसके अधिकार क्षेत्र में है, इसकी जानकारी मिलने के बाद स्वत: सभी समस्या समाप्त हो जायेगी.