सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Kharsawan Puja Fund : चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही समाप्त होने को है, लेकिन अब तक खरसावां अंचल कार्यालय को पूजा मद की राशि का आवंटन नहीं मिल पाया है. आवंटन में हो रही देरी के कारण क्षेत्र में वर्षभर आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक पूजा-पाठ के आयोजन को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. अगले सप्ताह के भीतर आवंटन नहीं मिलने की स्थिति में 16 जुलाई से आयोजित होने वाले रथ यात्रा उत्सव को संपन्न कराने में परेशानी हो सकती है. खरसावां में प्रतिवर्ष विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के संचालन के लिए राज्य सरकार की ओर से पूजा मद में राशि उपलब्ध करायी जाती है. करीब 2 माह पूर्व ही खरसावां अंचल कार्यालय की ओर से विभागीय पत्र लिख कर इस मद में 15 लाख रुपये के आंवटन की मांग की गई है. हालांकि वित्तीय वर्ष शुरू होने के लगभग तीन माह बाद भी राशि स्वीकृत नहीं हुई है. इससे आगामी धार्मिक आयोजनों की तैयारियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जतायी जा रही है.
सरकारी खर्च पर होता है दस धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन
खरसावां सीओ सिंकु के अनुसार राज्य सरकार के विधि विभाग से प्राप्त राशि से खरसावां में दस पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है. इसमें मुख्य रुप से चड़क पूजा, चैत्र पर्व, रथ यात्रा, धुलिया जंताल पूजा, नुआखाई जंताल पूजा, इंद्रोत्सव, दुर्गा पूजा, काली पूजा के साथ साथ मुहर्रम का भी आयोजन किया जाता है. साथ ही प्रत्येक सप्ताह खरसावां के कुम्हारसाही स्थित पाउड़ी पीठ में मां पाउड़ी की पूजा की जाती है. खरसावां सीओ कप्तान सिंकु ने बताया कि खरसावां अंचल कार्यालय की ओर से जिला प्रशासन से शीघ्र आवंटन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है. समय पर राशि उपलब्ध नहीं होने से धार्मिक अनुष्ठानों के सुचारु संचालन में परेशानी उत्पन्न हो रही है.
अगले माह कई प्रमुख धार्मिक आयोजनों का है कार्यक्रम
आवंटन नहीं मिलने के बावजूद भी किसी तरह खरसावां अंचल कार्यालय की ओर से चड़क पूजा और मुहर्रम के लिए निर्धारित राशि पूर्व में ही उपलब्ध करा दिया है. आने वाले दिनों में क्षेत्र में रथ यात्रा, नुआखाई जंताल समेत कई महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने हैं. इसके अलावा खरसावां स्थित ऐतिहासिक मां पाउड़ी पीठ में प्रत्येक गुरुवार को नियमित पूजा-अर्चना होती है. इस पूजा में प्रतिमाह लगभग 20 हजार रुपये खर्च होते हैं. आवंटन नहीं मिलने से इन धार्मिक गतिविधियों के संचालन में आर्थिक कठिनाइयां सामने आने लगी हैं.
देश की आजादी के बाद मर्जर एग्रिमेंट के तहत मिलता है पूजा मद का आवंटन
खरसावां में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठानों के लिए राज्य सरकार द्वारा आवंटन उपलब्ध कराने की परंपरा आजादी के बाद से चली आ रही है. इसका आधार वर्ष 1947 में खरसावां रियासत के भारत गणराज्य में विलय के दौरान हुआ मर्जर एग्रिमेंट है. खरसावां राजघराने के राजा गोपाल सिंहदेव के अनुसार, तत्कालीन राजा श्रीरामचंद्र सिंहदेव और भारत सरकार के तत्कालीन गृह सचिव (राजनीतिक मामले) वी.पी. मेनन के बीच हुए मर्जर एग्रिमेंट में यह प्रावधान किया गया था कि रियासत काल में राजपरिवार द्वारा पैलेस से बाहर आयोजित किए जाने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों का संचालन भविष्य में सरकारी स्तर पर किया जाएगा. इसी समझौते के तहत आज भी खरसावां के दस प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन के लिए राज्य सरकार की ओर से राशि उपलब्ध कराई जाती है. यह व्यवस्था क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है.
1948 में पहली बार मिला था 5,587 रुपये का आवंटन
1948 में पहली बार खरसावां में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिए तत्कालिन राज्य सरकार से 5,587 रुपये का आवंटन मिला था. बाद में समय के साथ राशि में बढ़ौतरी होती गई. पिछले दो वित्तीय वर्ष 2025-26 व 2024-25 में भी 15 लाख रुपये का आंवटन मिला था. जबकि वर्ष 2023-24 में 15.80 लाख रुपये का आंवटन मिला था. वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार से 7.5 लाख और वर्ष 2021-22 में साढ़े पांच लाख का आवंटन मिला था. दो वर्ष पहले ही खरसावां में नए रथ का निर्माण कराया गया है. इसके लिए भी अलग से आवंटन मिला था.
किस वर्ष कितना आवंटन राशि मिला ?
- 2021-22 : 5.5 लाख
- 2022-23 : 7.5 लाख
- 2023-24 : 15.80 लाख
- 2024-25 : 15 लाख
- 2025-26 : 15 लाख
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