Jharkhand News: झारखंड की राजधानी रांची में छोटानागपुर लॉ कॉलेज (ऑटोनोमस) ने हायर एजुकेशन के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है. अब सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट के सिटिंग जजों के साथ-साथ आईएएस, आईपीएस, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी भी झारखंड के इस कॉलेज से पीएचडी कर सकेंगे. यह निर्णय रविवार को कॉलेज की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया. बैठक की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ पंकज कुमार चतुर्वेदी ने की. कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि इस फैसले से एडमिनिस्ट्रेटिव और ज्यूडिशियल क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों को रिसर्च का मौका मिलेगा. इससे पॉलिसी बनाने और ज्यूडिशियल प्रोसेस को एकेडमिक मजबूती मिलेगी.
कोर्सवर्क से मिलेगी छूट
एकेडमिक काउंसिल के फैसले के अनुसार, जज, आईएएस, आईपीएव और दूसरे प्रोफेशनल्स को पीएचडी में कोर्सवर्क से छूट दी जाएगी, लेकिन रजिस्ट्रेशन, रिसर्च प्रपोजल, इंटरव्यू और थीसिस से जुड़ी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी. इसका मकसद यह तय करना है कि रिसर्च की क्वालिटी और यूजीसी स्टैंडर्ड से कोई समझौता न हो. कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन ने साफ किया है कि अनुभव के आधार पर छूट दी जा रही है, लेकिन एकेडमिक इवैल्यूशन पूरी सख्ती के साथ होगा.
एलएलबी-एलएलएम के सिलेबस में जुड़ेगी इंडियन ट्रेडिशन नॉलेज
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि अब एलएलबी और एलएलएम के सभी पेपर्स में इंडियन ट्रेडिशनल नॉलेज से जुड़े प्रोविजन्स को शामिल किया जाएगा. इसमें विशेष रूप से ज्यूरिसप्रूडेंस, लीगल हिस्ट्री, इंटरनेशनल लॉ, फैमिली लॉ, बैंकिंग लॉ, आर्बिट्रेशन, मेडिएशन जैसे सब्जेक्ट्स में इंडियन ट्रेडिशन और फिलॉसफी के पहलुओं को जोड़ा जाएगा. कॉलेज का मानना है कि इससे स्टूडेंट्स को केवल वेस्टर्न लॉ सिस्टम ही नहीं, बल्कि भारत की एंसिएंट लीगल ट्रेडिशन, सोशल सिस्टम और जस्टिस कॉन्सेप्ट की भी गहरी समझ मिलेगी.
पीएचडी वैल्यूशन में फॉरेन एक्जामिनर भी होंगे शामिल
पीएचडी (लॉ) प्रोग्राम के तहत अब पूरी थीसिस और समरी ऑनलाइन से वैल्यूशन के लिए भेजे जाएंगे. इसमें दो एक्जामिनर होंगे, जिनमें से एक फॉरेन का एक्सपर्ट जरूर शामिल होगा. इंटरव्यू प्रोसेस की पूरी वीडियोग्राफी की जाएगी और उसे कॉलेज के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल या वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा. इस व्यवस्था का मकसद ट्रांसपैरेंसी बढ़ाना और रिसर्च प्रोसेस को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाना है.
एलएलबी-एलएलएम में लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग भी शामिल
बार काउंसिल के डायरेक्शन में कॉलेज ने एलएलबी और एलएलएम में ‘लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग’ को जोड़ने की भी मंजूरी दी है. इसके तहत स्टूडेंट्स को लॉ और बिल तैयार करने, शब्दावली के चयन, कानूनी भाषा और ड्राफ्टिंग की टेक्नोलॉजी की प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी. यह कदम खास तौर पर उन स्टूडेंट्स के लिए अहम माना जा रहा है, जो भविष्य में ज्यूडिशियल सर्विस, लॉ कमिशन या पॉलिसी मेकिंग से जुड़ना चाहते हैं.
रिसर्च एडवाइजरी कमेटी रखेगी नजर
कॉलेज में रिसर्च एडवाइजरी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो हर महीने या तीन महीने में रिसर्च स्कॉलर्स की प्रोग्रेस की रिव्यू करेगी. रिसर्च प्रपोजल के लिए मल्टीलेयर फिल्टर सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसमें प्रपोजल को तीन नेशनल और इंटरनेशनल एक्सपर्ट के पास भेजा जाएगा. उनकी मंजूरी के बाद ही रजिस्ट्रेशन संभव होगा. पीएचडी में एडमिशन और उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया लोकभवन, यूजीसी और रांची विश्वविद्यालय की गाइडलाइंस के तहत होगी.
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2026 से लागू होगा पीएचडी प्रोग्राम
बैठक में पीएचडी (लॉ) प्रोग्राम 2026 को फॉर्मल मंजूरी दे दी गई है. एकेडमिक काउंसिल से पहले फर्स्ट शिफ्ट में बोर्ड ऑफ स्टडीज की भी बैठक हुई थी. काउंसिल की बैठक में रांची यूनिवर्सिटी डीएसडब्ल्यू डॉ सुदेश साहू, डीन डॉ अर्चना दुबे समेत कई सीनियर प्रोफेसर और शिक्षाविद मौजूद रहे. कॉलेज का यह फैसला झारखंड में लॉ एजुकेशन और रिसर्च को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है.
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