JSSC Recruitment Scam: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) नियुक्ति घोटाले की सीआईडी जांच पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस संवेदनशील मामले की जांच में लीपापोती की जा रही है और सच्चाई को दबाकर प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मरांडी ने कहा कि जैसी आशंका जताई गई थी, वैसी ही शिकायतें अब मिल रही हैं. उनके अनुसार, जांच के दौरान जिन लोगों से पूछताछ की जा रही है, यदि वे किसी हाईप्रोफाइल नेता, अधिकारी या उनके बिचौलियों के जरिये रिश्वत के लेन-देन और संलिप्तता के बारे में जानकारी देते हैं, तो उनके बयानों के ऐसे हिस्सों को कथित तौर पर रिकॉर्ड से हटवा दिया जा रहा है.
बयानों से नाम हटाने का लगाया आरोप
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि जांच से जुड़े कुछ छोटे अधिकारियों ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर उन्हें बताया है कि उच्चाधिकारी ऐसे बयानों को रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करने का दबाव बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि ये शिकायतें सही हैं, तो यह न्याय के साथ गंभीर खिलवाड़ है. नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि इतने संवेदनशील मामलों में बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी होनी चाहिए. साथ ही मूल रिकॉर्डिंग को बिना किसी छेड़छाड़ या एडिटिंग के सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि बाद में किसी अधिकारी को अपनी सुविधा के अनुसार बयान बदलने या उसमें बदलाव करने का अवसर नहीं मिले.
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बड़े सरगनाओं को बचाने का लगाया आरोप
बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता की भूमिका के बाद अब मनोज कौशिक की अगुवाई में चल रही जांच को लेकर भी छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े सरगनाओं को बचाने की शिकायतें मिल रही हैं. उन्होंने जांच अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बयानों से नाम हटाने और डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने का खेल तत्काल बंद किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कुर्सी और सत्ता जाने के बाद भी किए गए कृत्यों की जवाबदेही बनी रहती है.
सीबीआई जांच की अनुशंसा की मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि छात्रों और बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाए. उन्होंने कहा कि युवाओं के आक्रोश को और नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. इसके लिए पूरे मामले की बिना किसी विलंब के सीबीआई जांच की अनुशंसा की जाए. उन्होंने सभी मूल साक्ष्यों और बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की भी मांग की, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे और मामले से जुड़े तथ्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके.
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