JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन में अब नया मोड़ आ गया है. JSSC-CGL समेत 14 परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. अब उनकी लड़ाई भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और पेपर लीक से मुक्त बनाने की दिशा में होगी.
देवेंद्र महतो ने मंगलवार को रांची में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक ‘Blueprint’ तैयार किया है, जिसे वह राज्य सरकार के सामने रखेंगे. उनका कहना है कि केवल CBI या CID जांच से छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि भविष्य में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनानी होगी.
परीक्षा रद्द होने के बाद अब अगली लड़ाई
देवेंद्र महतो ने सरकार द्वारा 14 परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को अभ्यर्थियों की बड़ी जीत बताया. उन्होंने कहा कि उनका 16 दिन का भूख हड़ताल समाप्त हुआ है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. अब आंदोलन का दूसरा चरण JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर चलाया जाएगा.
उन्होंने सरकार से भविष्य की परीक्षाओं में पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं की रोकथाम की गारंटी देने की मांग की है. उनके अनुसार परीक्षा व्यवस्था में ऐसा सुधार जरूरी है, जिससे अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा रद्द होने या परिणाम प्रभावित होने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़े.
क्या है देवेंद्र महतो का Blueprint?
फिलहाल देवेंद्र महतो ने Blueprint के सभी बिंदुओं को सार्वजनिक नहीं किया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य लीक-प्रूफ परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता, निगरानी और भर्ती प्रक्रिया में सुधार है. उन्होंने सरकार के सामने अपना प्रस्ताव रखने की बात कही है. इसलिए Blueprint के विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसमें परीक्षा कराने से लेकर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, निगरानी और जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या-क्या सुझाव शामिल हैं.
सरकार भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी में
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के साथ भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति बनाने की बात कही है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली परीक्षा सुधार समिति से भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को मजबूत करने के उपाय सुझाने की उम्मीद है.
वहीं, सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच की घोषणा भी की है. JPSC सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की बात कही गयी है.
आंदोलन का दूसरा चरण कितना अहम?
JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं के रद्द होने के बाद अब असली चुनौती आगे की भर्ती प्रक्रिया को लेकर है. अभ्यर्थियों के सामने सवाल है कि भविष्य की परीक्षाएं किस व्यवस्था के तहत होंगी और उन्हें कितनी पारदर्शिता की गारंटी मिलेगी.
ऐसे में देवेंद्र महतो का Blueprint और सरकार की परीक्षा सुधार समिति- दोनों आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होंगे. यदि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रस्तावों में सहमति बनती है, तो इसका असर झारखंड की आगामी JPSC और JSSC परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया पर पड़ सकता है. फिलहाल महतो ने संकेत दिया है कि आंदोलन का अगला चरण ‘भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती’ और ‘लीक-प्रूफ परीक्षा व्यवस्था’ की मांग पर केंद्रित रहेगा.
