सावन में जमकर हुई बारिश ने सूखे को किया समाप्त, झारखंड में 87 प्रतिशत खेतों में लग गयी धान की फसल

झारखंड में अल नीनो के खतरे के बावजूद, अगस्त की भरपूर बारिश ने सूखे की आशंका को खत्म कर दिया है. राज्य में धान की रोपनी 87% तक पूरी हो चुकी है, जिससे कृषि विभाग की चिंताएं कम हुई हैं. खाली बचे 13% खेतों के लिए वैकल्पिक बीजों की व्यवस्था की गई है, और मोटा अनाज उगाने की योजना पर काम चल रहा है.

मनोज सिंह की रिपोर्ट

Jharkhand Paddy Plantation: झारखंड में धान की रोपनी का काम खत्म हो गया है. खरीफ के शुरुआती दिनों में अल नीनो की आशंका के मद्देनजर राज्य में सूखे की आशंका जतायी गयी थी. बारिश के शुरुआती महीनों जुलाई तक स्थिति खराब ही थी. जुलाई तक राज्य में 376 मिमी ही बारिश हुई, जबकि सामान्यत: 508 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी. लेकिन अगस्त में जब सावन शुरू हुआ, तो बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो गयी. 

अगस्त की बारिश से खत्म हुआ सूखे का संकट

सावन के दौरान अगस्त में सामान्य से 27 मिमी अधिक बारिश हुई. इस दौरान 290 मिमी बारिश होती है, लेकिन हुई 371 मिमी. इससे राज्य में छाया सूखे का संकट खत्म हो गया. इसका परिणाम यह हुआ कि कृषि विभाग ने जितने खेतों में धान लगाने का लक्ष्य रखा था, उसकी तुलना में करीब 87 फीसदी खेतों में रोपनी हो गयी है. 31 अगस्त को रोपनी का आखिरी समय माना जाता है. यह समय पूरा होने के बाद अब मात्र 13 फीसदी खेत ही खाली रह गये हैं. इन खेतों के लिए विभाग ने अलग स्तर पर योजना बनायी है. खाली खेतों के लिए वैकल्पिक बीजों की तैयारी की गयी है. इसके साथ ही राज्य में सूखे की आशंका भी खत्म हो गयी है. 

87 फीसदी धान रोपनी पूरी 

विभाग के अनुसार, राज्य में धान की खेती के लिए कुल 1801 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था. इसकी तुलना में 1557 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी हो गयी है. पिछले साल 1706 हजार हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी. यह इस साल के मुकाबले आठ प्रतिशत ज्यादा थी. इसके अलावा, इस साल 313 हजार हेक्टेयर में मक्का लगाने का लक्ष्य था, जिसकी तुलना में 257 हजार हेक्टेयर में मक्का लगाया गया है. यह लक्ष्य का करीब 81.94 फीसदी है. धनबाद, गिरिडीह और पलामू में लक्ष्य के 80 फीसदी से कम खेतों में धान की रोपनी हो पायी है. शेष जिलों में 80 फीसदी से अधिक खेतों में धान की रोपनी हो गयी है.

किस साल कितने हजार हेक्टेयर में लगा धान?

वर्षधान (हजार हेक्टेयर)
2021-221763
2022-23855
2023-241337
2024-251596
2025-261706
2026-271557

किस जिले में कितने हजार हेक्टेयर में लगा धान?

जिलाटारगेटरोपनीजिलाटारगेटरोपनी
रांची171142रामगढ़3530
खूंटी7663चतरा3630
गढ़वा188178कोडरमा1713
सिमडेगा8572गिरिडीह8861
लोहरदगा4740धनबाद4332
गोड्डा5648बोकारो3329
पलामू5136दुमका11194
लातेहार3026देवघर5245
पूर्वी सिंहभूम11098जामताड़ा5242
पश्चिमी सिंहभूम186168गोड्डा5142
सरायकेला10094साहिबगंज4946
हजारीबाग8473पाकुड़4943

पाकुड़ में सबसे कम और पश्चिमी सिंहभूम में सबसे ज्यादा बारिश 

झारखंड में मॉनसून की बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई है. अगस्त माह की समाप्ति तक बारिश सामान्य से मात्र छह फीसदी कम दर्ज की गई है. एक जून से 31 अगस्त तक राज्य में 747.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 798.8 मिमी तय है. इस दौरान पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 52% अधिक बारिश हुई. यहां 1224.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 807.3 मिमी है. लातेहार में 24% और सरायकेला में 15% अधिक बारिश हुई है. रांची में सामान्य से आठ फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है. इसके विपरीत पाकुड़ में सामान्य से 52% कम बारिश हुई है. देवघर और कोडरमा में 41-41%, गढ़वा में 39% और चतरा में 37% बारिश कम हुई है.

कृषि विभाग के निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने कहा  

इस बार अच्छी खेती हुई है. धान में हम पिछले साल से मात्र आठ फीसदी कम हैं. अन्य फसलों में स्थिति पिछले साल से बेहतर है. अब जो खेत खाली रह गये हैं, वहां मोटा अनाज लगवाया जायेगा. इसके लिए मिलेट मिशन के तहत आवेदन मांगे जा रहे हैं. अब तक एक लाख से अधिक आवेदन आ चुके हैं.

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लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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