Jharkhand Mayor Election: झारखंड में मेयर चुनाव के परिणामों ने तमाम राजनीतिक चाणक्यों को चौंकाकर रख दिया है. इस बार के मेयर चुनाव परिणामों ने न केवल सभी तरह के समीकरणों को बदलकर रख दिया है, बल्कि राजनीतिक दलों के कई पारंपरिक गढ़ों को भी हिलाकर रख दिया है. इसका जीता-जागता उदाहरण आदित्यपुर हजारीबाग सीट है.
आदित्यपुर में भाजपा समर्थित संजय सरदार ने मजबूत बूथ मैनेजमेंट के दम पर जीत दर्ज की, तो हजारीबाग में निर्दलीय अरविंद कुमार राणा ने जनसंपर्क और अनोखे भिक्षाटन अभियान से बाजी मार ली. मानगो में कांग्रेस समर्थित सुधा गुप्ता ने बड़ी जीत के साथ सियासी तस्वीर बदल दी, जबकि गिरिडीह में झामुमो समर्थित प्रमिला मेहरा ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगा इतिहास रचा. धनबाद में संजीव सिंह बढ़त बनाए हुए हैं. चास में भोलू पासवान ने पिछड़ने के बाद जीत हासिल की. वहीं, मेदिनीनगर से भाजपा समर्थित अरुणा शंकर ने जीत दर्ज की. चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों और व्यक्तित्व को प्राथमिकता दी है.
हजारीबाग में मतदाताओं ने अरविंद राणा पर जताया भरोसा
हजारीबाग नगर निगम चुनाव में इस बार मतदाताओं ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को दरकिनार करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी अरविंद कुमार राणा (23,500) पर भरोसा जताया. आठ प्रत्याशियों के बीच हुए मुकाबले में अरविंद राणा ने निर्दलीय उम्मीदवार मो सरफराज (18847), भाजपा समर्थित सुदेश कुमार, झामुमो समर्थित विकास कुमार राणा, कांग्रेस समर्थित मो तस्लीम और जेएलकेएम समर्थित अमरेंद्र नारायण सहित दूसरे उम्मीदवारों को पराजित कर महापौर पद पर जीत दर्ज की.
अरविंद ने घर-घर भिक्षाटन कर लोगों को जोड़ा
चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद कुमार राणा की रणनीति सबसे अलग रही. उन्होंने नगर निगम क्षेत्र के लगभग हर घर तक पहुंच कर 10 रुपये के भिक्षाटन के माध्यम से मतदाताओं से समर्थन मांगा. इस अनोखे और भावनात्मक अभियान ने लोगों का ध्यान खींचा और उन्हें जनसामान्य से सीधे जोड़ दिया. दूसरे स्थान पर रहे सरफराज अहमद मतदाताओं के ध्रुवीकरण में उलझ गए. दूसरी ओर राजनीतिक दलों के समर्थित उम्मीदवार मुख्य रूप से रोड शो और बैठक तक ही सीमित रह गए.
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मतदाताओं की दिखी नाराजगी
झारखंड के मेयर पद के चुनाव परिणामों में मतदाताओं की नाराजगी स्पष्ट दिखी. स्थानीय लोगों का मानना था कि पूर्व में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को नगर परिषद और नगर निगम चुनाव में भारी मतों से जीत मिली, लेकिन अपेक्षित विकास कार्य धरातल पर नजर नहीं आए. पूर्व मेयर का कार्यकाल भी विवादों में रहा, जिससे मतदाताओं में असंतोष पनपा. पेशे से वकील और पत्रकार अरविंद कुमार राणा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं. विशेषकर छठ महापर्व पर कम दरों में फल एवं पूजा सामग्री उपलब्ध कराने की पहल को लोगों ने सराहा.
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