चारा घोटाले के मुकदमों से जुड़े CBI अधिवक्ता को हटाना सही, Jharkhand HC ने खारिज की याचिका

झारखंड हाई कोर्ट ने सीबीआई के 78 वर्षीय सरकारी अधिवक्ता शिव कांत श्रीवास्तव की सेवा समाप्त किए जाने के फैसले को सही करार दिया है. कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए नियुक्ति शर्तों का पालन होने की बात कही.

रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने सीबीआइ के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (सरकारी अधिवक्ता) के पद से 78 वर्षीय अधिवक्ता शिव कांत श्रीवास्तव उर्फ एसके श्रीवास्तव की सेवा समाप्त किये जाने को सही ठहराया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सेवा समाप्ति के आठ जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी.

एक माह के नोटिस पर समाप्त हुई नियुक्ति

अदालत ने कहा कि सीबीआइ ने निर्धारित नियमों के तहत एक माह का नोटिस देकर प्रार्थी की नियुक्ति समाप्त की है. नियुक्ति की शर्तों में भी एक माह के नोटिस पर सेवा समाप्त करने का प्रावधान था. ऐसे में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया और सेवा समाप्ति के आदेश में कोई अवैधता या मनमानी नहीं है.

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत सरकार को किसी व्यक्ति को अधिवक्ता के रूप में सेवाएं जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. सरकार को अपना अधिवक्ता चुनने का अधिकार है.

दुर्भावना और भेदभाव के आरोप भी खारिज

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गयी कि सेवा समाप्त करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया. साथ ही उनके साथ नियुक्त अन्य अधिवक्ता अब भी सीबीआइ के लिए काम कर रहे हैं, जबकि केवल उनकी सेवा समाप्त की गयी. इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताते हुए संविधान के अनुच्छेद-14 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया.

अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. दुर्भावना के आरोप पर कोर्ट ने कहा कि केवल आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है, इसके समर्थन में ठोस साक्ष्य भी होना चाहिए.

पशुपालन घोटाले के मुकदमों का दिया गया हवाला

अदालत ने कहा कि 18 सितंबर 2013 का पत्र प्रार्थी के मामले में मददगार नहीं है, क्योंकि पशुपालन घोटाले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के मुंद्रिका प्रसाद सिंह बनाम बिहार राज्य और स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश बनाम राकेश कुमार केसरी के फैसलों का भी उल्लेख किया.

सीबीआइ की ओर से एएसजीआइ प्रशांत पल्लव ने सेवा समाप्ति के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है. सरकार को किसी एक अधिवक्ता की सेवाएं लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

वर्ष 2003 से सीबीआइ के पैनल में थे

अधिवक्ता शिव कांत श्रीवास्तव वर्ष 2003 से पशुपालन मामलों यानी चारा घोटाले से जुड़े मामलों के लिए सीबीआइ के अतिरिक्त अधिवक्ता पैनल में काम कर रहे थे. उन्होंने पशुपालन घोटाले से जुड़े कई मामलों में सीबीआइ की ओर से पैरवी की थी. उन्होंने अपनी सेवा समाप्ति के आठ जुलाई 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया.

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By Rana pratap

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