पिंक रिवॉल्यूशन की ओर बढ़ता जामताड़ा बेवा-धनबाद, बीरगांव व जिलीमटांड़ में आइएफसी के तहत लेयर बर्ड यूनिट स्थापित उमेश कुमार, जामताड़ा. ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जेएसएलपीएस की पहल जामताड़ा में नयी सफलता की कहानी लिख रही है. सदर प्रखंड के बेवा-धनबाद, बीरगांव और जिलीमटांड गांव में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आइएफसी) के तहत स्थापित लेयर बर्ड (अंडा उत्पादक मुर्गी पालन) यूनिटों ने सखी मंडल की महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की राह भी खोल दी है. प्रथम चरण में स्थापित तीनों यूनिटों से अब व्यावसायिक स्तर पर अंडा उत्पादन शुरू हो चुका है. प्रत्येक यूनिट से प्रतिदिन 60 से 70 अंडों का उत्पादन हो रहा है, जबकि तीनों यूनिटों से मिलाकर रोजाना करीब 200 अंडे बाजार में उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन यूनिटों का संचालन सखी मंडल की सदस्य रेखा कुमारी बेसरा (बेवा धनबाद), तबस्सुम खातून (बीरगांव) और जैनब प्रवीण (जिलीमटांड) कर रही हैं. शुरुआती चरण में ही उन्हें हर माह लगभग 3,000 रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है. लाभुक महिलाओं ने बताया कि उत्पादन बढ़ने के साथ उनकी आय में और वृद्धि होगी. यह पहल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय बाजार में ताजे एवं प्रोटीन युक्त अंडों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण से लड़ने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इस संबंध में जेएसएलपीएस के समन्वयक इकबाल अहमद ने बताया कि प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए भविष्य में जिले के अन्य गांवों में भी ऐसी यूनिटें स्थापित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति दिया जा सके.
अंडे का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रहीं सखी मंडल की दीदियां
जामताड़ा. ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जेएसएलपीएस की पहल जामताड़ा में नयी सफलता की कहानी लिख रही है.
