राजेश चौधरी, फतेहपुर प्रखंड के चौकुंदा गांव में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बना आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ नजर आ रहा है. वर्ष 2021 में पूरी तरह बनकर तैयार यह भवन अब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का दर्जा नहीं हासिल कर सका है, जिससे क्षेत्र के लोगों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है. करीब 15 पंचायतों के लिए बनाए गए इस केंद्र से लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवा की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान में यह केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में सीमित सेवाएं ही दे रहा है. स्थिति यह है कि पूरे केंद्र की जिम्मेदारी महज एक डॉक्टर पर है, और इसके भरोसे चल रहा है. लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में फैले इस अस्पताल का निर्माण वर्ष 2017 में शुरू हुआ था और तीन वर्षों में पूरा हो गया. उस समय इसे सीएचसी का दर्जा देने की घोषणा भी की गयी थी, लेकिन सात साल बाद भी यह घोषणा कागजों तक ही सीमित है. आधुनिक भवन और पर्याप्त संसाधनों के बावजूद यहां जरूरी जांच सुविधाएं जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी उपलब्ध नहीं है. स्वास्थ्य केंद्र में वर्तमान में 1 डॉक्टर, 6 एएनएम, 2 जीएनएम सहित कुल 25 कर्मी कार्यरत हैं, जबकि मानकों के अनुसार यहां कम से कम 5 डॉक्टर और 45 स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता है. आपातकालीन सेवाओं के लिए एम्बुलेंस की भी सुविधा नहीं है, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी एक बड़ी समस्या है. सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को दूसरे जिलों या पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. समय पर इलाज न मिलने से कई बार स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सक प्रभारी चिकित्सक के अनुसार सीएचसी का दर्जा देना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. कहा कि संसाधन और डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता होने पर ही स्थिति में सुधार संभव है. -डॉ उजाला मुर्मू, प्रभारी चिकित्सक
चौकुंदा गांव के स्वास्थ्य केंद्र में न हैं विशेषज्ञ डॉक्टर और न जांच की सुविधाएं
फतेहपुर. चौकुंदा गांव में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बना आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ नजर आ रहा है.
