लकी ड्रॉ से दो लोगों को उमरा हज का मिला सौभाग्य जामताड़ा. शहर के पाकडीह–सरखेलडीह मैदान में शनिवार देर रात्रि जश्न-ए-मौलूद-ए-काबा व जियारत-ए-हरमैन शरीफेन कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से हुई, जिससे माहौल पूरी तरह रूहानी हो गया. जलसे का आयोजन मौलाना मजहरूल कादरी के नेतृत्व में किया गया. इसे सफल बनाने में मस्जिद कमेटी व मदरसा निजामिया गरीब नवाज पाकडीह व सरखेलडीह कमेटी का सराहनीय योगदान रहा. इसके अलावा मियांडीह, बुधुडीह, बेवा, धनबाद, नाराडीह समेत आसपास के कई गांवों के नौजवानों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया और व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संभाला. जलसे में मेहमान-ए-खुसूसी पीर-ए-तरीकत सैयद शाह मोहम्मद मसरूर राजी शाहबाजी (भागलपुर) और पीर-ए-तरीकत सैयद शाह अलहाज मोहम्मद मकबूल जमी शाहबाजी (भागलपुर) शामिल हुए. इसके अलावा सैयद जुलकरनैन बुखारी (हजरतपुर, पश्चिम बंगाल), सैयद शाह मोहम्मद शाह नूर अताई सहबाजी, मौलाना मुफ्ती गुलाम हैदर बरकाती, मौलाना शहादत हुसैन बरकाती (मधुपुर) भी मौजूद थे. महफिल को रूहानी रंग देने के लिए मौलाना अलहाज हबीबुल्लाह फैजी (मधुपुर), नसीम शहर गयाबीह, मौलाना जाकिर हुसैन सहस्त्रामी (सासाराम), शेर-ए-इस्लाम हबीबुल्लाह नूरी (मधुपुर), मुजाहिद राजा मजहरी (जामताड़ा) तथा नकीब-ए-अहले सुन्नत शाहबाज राजा ने नातिया कलाम और शेर-ओ-शायरी पेश कर समा बांध दिया. उलेमाओं ने हुजूर-ए-अकरम की सीरत, इस्लामी शिक्षाओं, नैतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे पर विस्तार से प्रकाश डाला. कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में अमन, शांति, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं और नई पीढ़ी को दीन की सही राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं. जलसे के दौरान अकीदतमंदों से सफेद रंग की पर्ची भरवायी गयी. सभी पर्चियों को एकत्र कर पारदर्शी तरीके से लकी ड्रॉ निकाला गया, जिसमें दो लोगों का नाम चयनित हुआ. चयनित अकीदतमंदों को उमरा हज के लिए भेजा जायेगा. मौके पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.
उलेमाओं की तकरीरों से गूंजी महफिल, अमन और भाईचारे का दिया पैगाम
जश्न-ए-मौलूद-ए-काबा व जियारत-ए-हरमैन शरीफेन कॉन्फ्रेंस का आयोजन
