PM Kisan, पीएम फसल बीमा और बैंकों के ऐप बनाकर करते थे संगठित साइबर क्राइम, सरगना समेत 6 गिरफ्तार

Organised Cyber Crime Gang Busted: जामताड़ा पुलिस ने साइबर क्राइम के लिए अत्याधुनिक आपराधिक गिरोह चलाने वाले सरगना समेत 6 साइबर क्रिमिनल्स को गिरफ्तार किया है. ये लोग देश भर में 400 से अधिक मामलों में वांछित हैं. इन्होंने अब तक 11.34 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है.

Organised Cyber Crime Gang Busted| रांची, शकील अख्तर : झारखंड पुलिस ने संगठित तरीके से साइबर क्राइम करने वाले अत्याधुनिक आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश किया है. गिरोह के 6 सदस्यों (मो मेहबूब आलम ) को गिरफ्तार किया गया है. इनमें 3 गिरिडीह जिले के हैं. एक साइबर क्रिमिनल साइबर क्राइम के लिए बदनाम जामताड़ा जिले के सियाटांड़ गांव का रहने वाला है. गिरफ्तार किये गये साइबर क्रिमिनल्स के नाम मो मेहबूब आलम, सफाउद्दीन अंसारी, मो आरिफ अंसारी, मो जसीम अंसारी, शेख बेलाल उर्फ डीके बॉस (सभी गिरिडीह जिले के रहने वाले) और अजय मंडल (जामताड़ा) हैं. 2 लोग कहां के रहने वाले हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. गिरिडीह से गिरफ्तार 4 साइबर क्रिमिनल्स में से 3 (मो मेहबूब आलम उर्फ डीके बॉस, मो आरिफ अंसारी उर्फ डीके बॉस, शेख बेलाल उर्फ डीके बॉस) ने अपना उपनाम डीके बॉस (DK Boss) रखा है. गिरिडीह और जामताड़ा से गिरफ्तार इन 6 साइबर क्रिमिनल्स के पास से पुलिस की टीम ने 14 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, 10 एटीएम कार्ड, 1 लैपटॉप, 2 फोर कार, 1 डीएसएलआर कैमरा, 1 ड्रोन कैमरा और 1,08,800 रुपए नकद बरामद किए हैं. गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ एहतेशाम वकारिब ने यह जानकारी दी है.

2 ट्रेनी आईपीएस की एक महीने की मेहनत रंग लाई

एसपी ने बताया कि झारखंड में साइबर क्राइम की गतिविधियों को रोकने और साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के लिए ट्रेनी आईपीएस ऑफिसर राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में स्पेशल टीम बनाई गई. टीम में प्रशिक्षु डीएसपी चंद्रशेखर को भी शामिल किया गया. इस टीम ने एक महीने से अधिक समय तक साइबर क्रिमिनल्स की गतिविधियों की कड़ी निगरानी की. टीम की मेहनत रंग लाई. टीम ने इस अत्याधुनिक साइबर क्राइम गिरोह के सरगना समेत 6 सदस्यों को धर दबोचा. इन साइबर क्रिमिनल्स की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि ये लोग संगठित तरीके से साइबर क्राइम के लिए अत्याधुनिक आपराधिक गिरोह चलाते थे. गिरफ्तार 6 साइबर क्रिमिनल्स में से 4 का पुराना साइबर क्राइम का इतिहास है.

जनकल्याणकारी योजनाओं के फर्जी ऐप बनाकर करते थे ठगी

जामताड़ा के एसपी ने बताया कि साइबर अपराधियों का यह गिरोह जनकल्याणकारी सरकारी योजनाओं के साथ-साथ कई बैंकों और एनपीसीआई इंटरनेशनल के फर्जी मोबाईल ऐप बनाते थे. इसके जरिए ही लोगों से ठगी करते थे. एसपी ने बताया कि गिरफ्तार किये गये ये अपराधी देश भर में 415 से अधिक साइबर क्राइम में लिप्त हैं. इन्होंने अब तक 11.34 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की है. इन लोगों के खिलाफ जामताड़ा साइबर क्राइम थाना में 26 जनवरी 2025 को केस संख्या 7/25 दर्ज की गई. इनके खिलाफ दर्ज केस में बीएनएस 2023 एवं 66/66(बी) (सी)(डी) आईटी एक्ट की धाराएं 111(2)(ii)/ 111(3)/ 111(4)/ 317(2)/ 317(4)/ 318(4)/ 319(2)/ 336(3)/ 338/ 340(2)/3(5) लगाई गईं हैं. एसपी ने साइबर क्राइम के इस संगठित अत्याधुनिक गिरोह की कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया.

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ये है गिरोह की कार्यप्रणाली

एसपी ने बताया कि दो प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में बनी टीम की जांच और साइबर क्रिमिनल्स की गिरफ्तारी के बाद उनके मॉडस-ऑपरेंडी के बारे में पता चला. ये लोग फर्जी एपीके (एप्लिकेशन) बनाकर लोगों से साइबर ठगी करते थे. साथ ही अन्य साइबर क्रिमिनल्स को यह ऐप बेचा भी करते थे.

  • सबसे पहले साइबर क्रिमिनल्स पीएम किसान योजना, पीएम फसल बीमा योजना और बैंकों (भारतीय स्टेट बैंक, कैनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, एनपीसीआई इंटरनेशनल आदि के नाम से) के ऐप डेवलप करवाते थे.
  • ऐप बनवाकर उसे व्हाट्सऐप (WhatsApp) के जरिये आम लोगों को भेजते थे.
  • व्हाट्सऐप पर आये इन लिंक्स को जैसे ही कोई डाउनलोड करता, उनका मोबाईल फोन हैक हो जाते.
  • इन मोबाइल एपीके में यूजर्स के फोन को हैक करने और एसएमएस/कॉल फॉरवर्डिंग का इस्तेमाल करके बैंक अकाउंट डिटेल, ओटीपी, जन्म तिथि चुरा लेते थे. इसका इस्तेमाल उन लोगों के बैंक अकाउंट से पैसे की निकासी के लिए किया जाता था.
  • संगठित तरीके से साइबर क्राइम का गिरोह चलाने वाले ये लोग इन एपीके को 20-25 हजार रुपए में अन्य साइबर क्रिमिनल्स के गिरोह को बेचते भी थे.

6 साइबर क्रिमिनल्स में 3 ‘डीके बॉस’ के नाम से भी करते हैं काम

एसपी ने बताया कि इस गिरोह के 3 सदस्य डीके बॉस के छद्म नाम से काम कर रहे थे. उनका फर्जी ऐप (APK) अन्य साइबर क्रिमिनल्स में काफी लोकप्रिय था. एसपी ने कहा कि साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने छापेमारी की, तो इन साइबर क्रिमिनल्स के फोन से 100 से अधिक फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन मिले. टीम उसकी जांच कर रही है. साइबर पुलिस टीम को जांच के दौरान इस गिरोह का एक फर्जी सेंट्रल पैनल भी मिला, जो हजारों पीड़ितों के एसएमएस देख सकता था.

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2700 पीड़ितों के डाटा, 2.78 लाख मैसेज

साइबर क्रिमिनलस के गिरोह के पास से पुलिस को करीब 2700 पीड़ितों का डाटा मिला. इसमें पीड़ितों के फोन से भेजे गये 2,77,846 संदेश शामिल हैं. इन संदेशों में व्हाट्सऐप ओटीपी, फोनपे लॉग-इन ओटीपी, बैंकों से लेनदेन संबंधी मैसेज शामिल हैं. ये सारी जानकारी गिरफ्तार किये गये साइबर क्रिमिनल्स ने जो वेबसाइट बनाई थी, उससे बरामद हुए हैं.

पीएनबी के 2000 अकाउंटहोल्डर्स के डाटा मिले

साइबर क्रिमिन्स के पास से जो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, उसमें पंजाब नेशनल बैंक के करीब 2000 और कैनरा बैंक के लगभग 500 अकाउंट होल्डर्स के डाटा मिले. बैंक के ग्राहकों से ठगी करने में इसका इस्तेमाल किया जाता था.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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