नानी बाई रो मायरो कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां प्रस्तुत संवाददाता, जामताड़ा. सखी सहेली ग्रुप की ओर से शहर में नानी बाई रो मायरो कथा आयोजित की गयी. इसके दूसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक महाराज उमेश शास्त्री ने भक्त नरसी मेहता के प्रेरणादायी चरित्र का वर्णन किया. महाराज ने बताया कि भक्त नरसी मेहता ने अपनी सारी संपत्ति साधु-संतों की सेवा में लगा दी थी. उनकी भक्ति और सेवा भाव को समाज के कुछ लोग सहन नहीं कर सके और उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से पूरे गांव में भोज का न्यौता भिजवा दिया. स्वयं नरसी मेहता को इसकी जानकारी भी नहीं थी, लेकिन भगवान अपने भक्तों की लाज हमेशा रखते हैं. भगवान ने स्वयं आकर भक्त नरसी मेहता की प्रतिष्ठा बचायी. कहा, जब नरसी मेहता की पुत्री नानी बाई के विवाह का समय आया तो ससुराल पक्ष उनकी गरीबी के कारण उन्हें बुलाना नहीं चाहता था. इसी उद्देश्य से कुमकुम पत्रिका में अत्यधिक दहेज की मांग लिख भेजी गयी, ताकि नरसी मेहता विवाह में पहुंच ही न सकें. पत्रिका लेकर एक वृद्ध व कमजोर ब्राह्मण को भेजा गया, जिससे वह समय पर जूनागढ़ नहीं पहुंच पाए, लेकिन भगवान की कृपा सोते हुए ब्राह्मण को स्वयं भगवान ने जूनागढ़ पहुंचा दिया और कुमकुम पत्रिका भक्त नरसी मेहता तक पहुंची. महाराज ने कहा कि आज के समय में भी अधिकतर रिश्ते धन-दौलत पर आधारित हो गए हैं, जब भक्त नरसी मेहता अपने भाइयों से सहायता मांगने पहुंचे तो उन्होंने भी मदद करने से इनकार कर दिया, जबकि उस समय समाज में एक-दूसरे के बच्चों के विवाह में सहयोग करने की परंपरा थी. कथा के माध्यम से संदेश दिया गया कि सुख में सभी साथ रहते हैं, लेकिन दुख में सच्चे साथी बहुत कम मिलते हैं. इसके बाद भक्त नरसी मेहता टूटी-फूटी बैलगाड़ी और कमजोर बैलों के साथ अपने सूरदास साथियों को लेकर नानी बाई का भात भरने अंजार नगर के लिए निकल पड़े. रास्ते में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रकट हुए और बैलगाड़ी व बैलों को सुंदर रूप प्रदान किया. कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकियों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में जामताड़ा नगर पंचायत की अध्यक्ष आशा गुप्ता उपस्थित रहीं. सखी सहेली ग्रुप ने नपं अध्यक्ष को सम्मानित किया.
सुख में सभी रहते साथ, दुख में सच्चे साथी कम मिलते हैं : कथावाचक
जामताड़ा. सखी सहेली ग्रुप की ओर से शहर में नानी बाई रो मायरो कथा आयोजित की गयी.
