भगवत कथा से होता है आध्यात्मिक चेतना का विकास : आचार्य

बनकाटी में श्री चैतन्य भागवत पारायण महायज्ञ छठे दिन जारी, जुटी भक्तों की भीड़

कुंडहित. कुंडहित प्रखंड अंतर्गत बनकाटी स्थित गौर गदाधर मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्री चैतन्य भागवत पारायण महायज्ञ रविवार को छठे दिन भी श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी रहा. इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के नवद्वीप धाम से पधारे कथावाचक आचार्य रामकुमार चक्रवर्ती ने श्रद्धालुओं को श्री चैतन्य चरितामृत कथा का रसपान कराया. कथावाचन के दौरान आचार्य ने रामानंद राय एवं श्री चैतन्य महाप्रभु के मध्य हुए साध्य–साधन तत्त्व संवाद, रागानुगा भक्ति का प्रचार, गंभीरा मंदिर में महाप्रभु के दिव्य भाव प्रकाश, हरिदास ठाकुर से मिलन एवं उनके परलोक गमन, गुंडिचा मार्जन, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा तथा राजा प्रतापरुद्र से मिलन जैसे प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने बताया कि गोदावरी तट पर हुए ऐतिहासिक संवाद में वर्णाश्रम धर्म को बाह्य बताते हुए कृष्ण प्रेम को सर्वोच्च साध्य तथा रागानुगा भक्ति को सर्वोत्तम साधन बताया गया. आचार्य ने ‘अचिन्त्य भेदाभेद’ सिद्धांत के आधार पर कहा कि ज्ञान, कर्म और विधि से ऊपर राधा–प्रेम के प्रति पूर्ण समर्पण ही जीवन का परम लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने संकीर्तन, कीर्तन और नृत्य के माध्यम से कृष्ण प्रेम को जन–जन तक पहुंचाया. उनका मत था कि जीव ईश्वर का नित्य सेवक है और हरिनाम जाप के माध्यम से भगवान से सीधा प्रेम संबंध स्थापित कर सकता है. हरिदास ठाकुर प्रसंग में आचार्य ने कहा कि श्री हरिदास ठाकुर गौड़ीय वैष्णव परंपरा में “नामाचार्य” के रूप में पूजित हैं और वे प्रतिदिन तीन लाख हरिनाम जप करते थे. उन्होंने कहा कि कलियुग में मानव जीवन का परम उद्देश्य हरिनाम संकीर्तन का भजन और प्रचार–प्रसार है. कथा श्रवण से भक्तों में भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है. मौके पर कथा सहयोगी गोपाल गोस्वामी, आशीष भौमिक, शंकर देव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.

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Published by: Rakesh kumar

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