शर्मनाक . मिहिजाम साप्ताहिक हाट में आरपीएफ एसआइ ने मानवता को किया शर्मसार
मिहिजाम : पुलिस से आमतौर पर लोग सुरक्षा प्रदान करने की उम्म्मीद करते हैं, लेकिन जिनके जिम्मे सुरक्षा देना रहे. यदि वे ही कानून को अपने हाथ में लेकर निर्दयता तथा क्रूरता को अपना लें तो लोग सुरक्षा मांगने किसके पास जायेंगे. ऐसा ही मामला सोमवार संध्या नगर के हटिया परिसर के निकट सामने आया है. मामला एक आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर द्वारा असहाय 80 वर्षीय वृद्धा को लाठी से बेरहमी से पिटाई की है. उक्त वृद्धा का कसूर बस इतना था
कि उसने पुलिस कर्मी द्वारा मांगे जाने वाले नाजायज वसूली को देने से इनकार कर दिया था. दरअसल रुक्मिणी नाम की उक्त वृद्धा बिहार के दानापुर से मिहिजाम में आयोजित होेने वाले साप्ताहिक हाट में बेचने के लिए सब्जी लेकर आती है. महिला विधवा है तथा इस उम्र में कड़ी मेहनत कर अपनी बची जिंदगी की गाड़ी को खींचना पड़ रहा है.
क्या कहते हैं थाना प्रभारी
थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह ने इस मामले में कहा कि पीड़िता की शिकायत मिलने के साथ ही पुलिस ने कार्रवाई आरंभ कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी. वृद्धा ने बाद में अपना आवेदन वापस ले लिया है.
न्याय के लिए वृद्धा ने थाने मे ंदिया आवेदन
वृद्धा का आरोप एसआइ ने मांगा था नजराना
वृद्धा ने आरोप लगाया कि चित्तरंजन रेलवे स्टेशन के आरपीएफ पोस्ट पर पदस्थापित जेके प्रसाद सब इंस्पेक्टर ने उनसे रेलवे की सीमा क्षेत्र से बाहर जाकर पीबी रोड पर महिला से वसूली की मांग की. उन्होंने नजराना देने में असमर्थता जतायी और इसी बात पर जेके प्रसाद ने लोगों के सामने ही उन्हें डंडे से पीटना शुरू कर दिया. उनके पैर में दाग उभर आये तथा दर्द से तड़पने लगी. लोगों की भीड़ जमा होने पर सब इंस्पेक्टर मौके से फरार हो गया.
महज गलती स्वीकारने पर पुलिस ने एसआइ को किया मुक्त
वार्ड पार्षद शुभाषिश चंद्रा तथा स्थानीय लोगों ने वृद्धा को मिहिजाम थाने ले आये. जहां पुलिस उनका फर्द बयान दर्ज कर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गयी. पीड़ित महिला ने पुलिस को दिये अपने आवेदन में जेके प्रसाद पर बेहरमी से पीटाई करने का आरोप लगाया. पीड़िता की शिकायत के बाद आरोपी सब इंस्पेक्टर को थाने बुलाया गया. जहां थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह के सामने उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की. आवेश में डंडे चला दिये. हालांकि मंगलवार सुबह महिला ने अपना आवेदन यह कहकर वापस ले लिया कि सब इंस्पेक्टर ने अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांग ली है, लेकिन यह घटना पुलिस की छवि को दागदार करता है.
