स्कूल में चहारदीवारी नहीं, बंद रहता है शौचालय

उदासीनता . बच्चों की उपस्थिति अच्छी फिर भी नजर अंदाज करते हैं विभाग विद्यालय से महज 200 मीटर में जोरिया जामताड़ा : जिला प्रशासन स्वच्छ भारत मिशन को लेकर तरह-तरह के बातें करने में पीछे नहीं हटते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से सटे नवीन उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय चिरूनबांध का हाल कुछ ओर ही है. नवीन […]

उदासीनता . बच्चों की उपस्थिति अच्छी फिर भी नजर अंदाज करते हैं विभाग

विद्यालय से महज 200 मीटर में जोरिया
जामताड़ा : जिला प्रशासन स्वच्छ भारत मिशन को लेकर तरह-तरह के बातें करने में पीछे नहीं हटते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से सटे नवीन उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय चिरूनबांध का हाल कुछ ओर ही है. नवीन उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में बच्चे नामांकित 85 है जिसमें उपस्थिति प्रतिदिन 75 प्रतिशित रहने के बावजूद शिक्षा विभाग नजर अंदाज कर रहे हैं. यह विद्यालय में शौचालय तो बनाया गया है,
लेकिन चहारदीववारी नहीं रहने के कारण अक्सर शौचालय में ताला लटका रहता है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे शौच कहां और कैसे करते होंगे. शौचालय में पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है जो एक बहुत बड़ी समस्या है. इससे यही साबित होता है कि विद्यालय के बच्चों को शौच करने के लिए निकट में अवस्थित जोरिया ही जाना पड़ता है. इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता.
विद्यालय में नहीं है कीचन शेड : विद्यालय में कीचन शेड न रहने के कारण वर्ग कक्ष में ही एमडीएम बनाया जाता है. यहां तक कि बरसात के बाद एमडीएम खुले आसमान में ही बनता है. जिससे बच्चों का पढ़ाई पर कम ध्यान ज्यादा नजर एमडीएम पर ही रहता है. इस विद्यालय में दिलचस्प बात यह है विद्यालय के सामने एक जोरिया है जो महज 200 मीटर ही होगा. इसके बावजूद भी प्रशासन द्वारा चार दिवारी निर्माण कराना मुनासिफ नहीं समझा. यह विद्यालय में दो पारा शिक्षिका कार्यरत है जो बच्चों को पठन-पाठन के साथ बच्चों को जोरिया नहीं जाने की निगरानी करते हैं.
क्या कहते हैं शिक्षिका : सहयोगी पारा शिक्षिका मीना मुर्मू ने कहा कि चहारदीवारी न रहने के कारण शौचालय में ताला लगाया जाता है. शौचालय को यदि खुला छोड़ देंगे तो मनचले लोगों द्वारा शौचालय को गंदा कर देते हैं, जिससे विद्यालय के बच्चाें को काफी दिक्कत होती है. शौचालय में पानी की समुचित व्यवस्था न रहने कारण बच्चों को चापानल से ही पानी ले जाना पड़ रहा है और शौचालय का उपयोग करते हैं. नजदीक में जोरिया होने को लेकर कहा कि बच्चों की देखभाल किया जाता है. चार दिवारी के लिए विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन विभाग द्वारा आज तक कोई पहल नहीं किया गया.
क्या कहते हैं प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी
बीइइओ गणेश प्रसाद सिंह ने कहा कि जिस विद्यालय में चार दिवारी नहीं बने है या फिर जो विद्यालय के समक्ष जोरिया, सड़क या तालाब है. वैसेेे विद्यालय को प्राथमिकता के साथ चार दिवारी का निर्माण होगा. सभी विद्यालयों की सूची सर्व शिक्षा अभियान द्वारा केंद्र सरकार को दिया गया है. केंद्र से स्वीकृत होने के उपरांत ही सभी विद्यालयों में चार दिवारी का निर्माण प्रारंभ हो जायेगा. फिलहाल जिला सर्व शिक्षा विभाग के पास राशि का आभाव है.
शिक्षक बच्चे को पढ़ाने के साथ-साथ बच्चे को करनी पड़ती है निगरानी
विद्यालय का खुला परिसर व रसोइघर में फैली गंदगी व बंद पड़ा शौचालय.

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