कुंडहित : गरीब हरिजनों की मदद के लिए सरकार व प्रशासन तरह-तरह की कल्याणकारी योजनायें चला रखी है. लेकिन विडंबना है कि कुंडहित प्रखंड के गायपाथर पंचायत के मानधारा गांव में हरिजन आज भी विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं से उपेक्षित है. गांव में हरिजन के 35 परिवार रहते हैं.
जहां पेयजल से लेकर सभी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है. आधा से ज्यादा परिवारों के पास बीपीएल नंबर नहीं है. जिसके कारण न तो पेंशन सुविधा और न ही इंदिरा आवास मिला है. रोजगार के अभाव में पुश्तैनी काम कर गुजर-बसर कर रहे हैं. लोग शिक्षा के अभाव में बैंक से ऋण भी नहीं ले पा रहे हैं. गांव के परिमल बादयकर का 10 वर्षीय पुत्र नि:शक्त है. 50 फीसदी प्रमाण पत्र रहने के बाद भी नि:शक्तता पेंशन नहीं मिल रहा. वहीं चंडी बादयकर के पुत्र हृदय रोग से ग्रसित है. हृदय के दोनों वॉल्व खराब है. लेकिन जानकारी के अभाव में असाध्य बीमारी के लाभ से वंचित है. गांव के बुजूर्ग दुलाल बादयकर के पास भी बीपीएल नंबर नहीं है.
जो भीख मांगकर जीवन व्यतीत करने को मजबूर है. गांव के मेरेंग बादयकर के पास बीपीएल नंबर तो है लेकिन इंदिरा आवास का लाभ नहीं. गांव के अनिल बादयकर, योगेंद्र नाथ देवांशी, दुलाल बादयकर, उत्तम बादयकर, पाखु बादयकर, अमित्य बादयकर, चंडी बादयकर, निर्मल बादयकर, मालती बादयकर, विपद बादयकर, परिमल बादयकर सहित अन्य के पास बीपीएल नंबर नहीं रहने से सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा. हरिजन टोला में एक चापानल के भरोसे 35 परिवार निर्भर है. ग्रामीणों ने कहा कि वोट के समय नेता, पंचायत प्रतिनिधि उल्लू बनाकर वोट ले लेते हैं. चुनाव जीतने के बाद ग्रामीणों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते हैं. इस संबंध में मुखिया कालिंदी मुमरू से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पायी.
क्या कहती है सदस्या
वार्ड सदस्या जोसना बादयकर ने कहा कि हरिजनों की समस्या को कई बार मुखिया को अवगत कराया. लेकिन कोई फायदा नहीं मिला.
क्या कहते हैं बीडीओ
बीडीओ अरविंद ओझा ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है, छुट्टी पर है. कुंडहित पहुंचने पर पंचायत सचिव से जानकारी ली जायेगी.
