सूख रहे जिलेवासियों के हलक
सिर्फ दावों में हो रहा विकास
जामताड़ा : हर साल तो पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लोगों के हलक तर करने की मुकम्मल व्यवस्था कराने का दंभ तो भरती है. लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में नाकाम साबित होती है. इस साल भी जो स्थिति देखी जा रही है, शायद ही वो अपने मकसद में कामयाब हो पाये. जिले में करीब 5322 चापाकल खराब हैं.
जबकि विभाग के पाले में अब तक 13922 चापाकल हैं. इनमें से विभाग 1896 चापानलों को ठीक कराने के लिए निविदा निकाल चुकी है. यह तसवीर इसी साल की नहीं हर साल देखी जाती है. लेकिन इसे ठीक कराने के नाम पर लाखों की राशि इधर उधर हो जाती है. जिले में सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां चापानल अब तक है ही नहीं. क्या इन चापाकलों को ठीक कर इलाके में पेयजल की व्यवस्था सुचारू करने की पहल विभाग करेगी, यह बड़ा सवाल है.
खिसकने लगा जलस्तर
गरमी के दस्तक के साथ ही इलाके में पेयजल संकट गहराने लगा है. सबसे खराब स्थिति ड्राइ जोन इलाकों की है. कई तालाब, कुएं तो ऐसे हैं जो अभी से सूख चुके हैं. आगे के भीषण गरमी में क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. जलस्तर अभी से खिसकने लगा है.
