बदहाली. अब तक नहीं भरे गये नाला के अवैध कोयला खदान
बड़ी दुर्घटना से नहीं किया जा सकता इनकार
जामताड़ा : नाला के अवैध खदानों के डोजरिंग का पेंच इसीएल व जामताड़ा जिला प्रशासन के बीच फंस गया है. वर्षों बीत गये लेकिन यहां के अवैध खदानों काे नहीं भरा जा सका है. हर बार खनन टास्क फोर्स की बैठक होती है. हर बार इस बैठक में यह मुद्दा उठता है. लेकिन वह बैठकों तक ही सीमित रहती है. अंजाम यह है कि चोरी छिपे यहां से कोयले निकाले जाते हैं. साथ ही धीरे धीरे पूरा इलाका धंसने के कगार पर है. कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है.
कई जगहों पर जमीन में बड़ी दरार आ गयी है. कई जगह में कोयले निकालने से इस प्रकार की सुरंग बन गयी है कि सड़क किनारे की जमीन में भी दरारें आ गयी है. जिस पर पुलिस प्रशासन की और से चौकिदारों को भी तैनात करना पड़ा था. जानकारों का कहना है कि यहां कोयले निकालने के लिए कुंआनुमा गड्ढा हजारों की संख्या में है.
यहां से निकलते
हैं कोयले
नाला थाना क्षेत्र के पलास्थली, कास्ता, चिचुड़बिल, परिहारपुर सहित अन्य जगहों में काफी संख्या में गड्ढे खोदकर कोयला निकाला गया है. हाल ही में डीसी ने भी ईसीएल के सीमएडी सांकतोड़िया को पत्र लिख कर गड्ढों को भरने का निर्देश दिया है. इसके पूर्व भी कई बार बैठक में निर्देश के बाद ईसीएल एक दो जेसीबी मशीन लगाकर कुछ गड्ढों को भर कर शेष गड्ढों को यूं ही छोड़ दिया है.
वन विभाग के क्षेत्र में घुसे माफिया
नाला क्षेत्र के बन विभाग के एरिया में भी गड्ढों को वन विभाग की टीम ने भरा है. जबकि बन विभाग के क्षेत्र में कहीं भी खनन क्षेत्र नहीं है. अंडरग्राउंड खनन करते-करते वन विभाग के क्षेत्र में माफिया घूस गये हैं. पिछले वर्ष वन विभाग ने अपनी खर्च पर पलास्थली वन क्षेत्र में कुल 13 गड्ढों में से 09 गडढें भरे गये थे. मार्च 2017 में खड़ीमाटी वन विभाग के क्षेत्र में कुल 60 गड्ढों में 45 गड्ढे भरे गये थे. कोयला चोरी का सिलसिला बावजूद जारी था. हाल ही में पुलिस अधीक्षक डॉ जया रॉय ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मोटरसाइकिल, बैलगाड़ी से कोयला चोरी करने वालों पर मामला दर्ज कर दर्जनों कोयला चोर को जेल भेजा है.
