झारसुगुड़ा: झारसुगुड़ा में बुधवार सुबह रहस्यमय परिस्थितियों में मिले नवजात शिशु के मामले ने नया मोड़ ले लिया. पहले एक परिवार के पास से नवजात शिशु को बरामद कर जिला बाल संरक्षण इकाई, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की सहायता से जिला मुख्यालय अस्पताल के एसएनसीयू (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के अनुसार बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है. इसी बीच एक 38 वर्षीय विधवा महिला स्वयं को बच्चे की जन्मदात्री बताते हुए थाने पहुंची और कहा, "बच्चे को मैंने जन्म दिया है, उसे मुझे सौंप दीजिए. " इसके बाद महिला को भी स्वास्थ्य जांच के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चे का वास्तविक जन्म किसने किया, वह किन परिस्थितियों में एक परिवार तक पहुंचा, किस वृद्धा ने उसे वहां पहुंचाया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था. इन सभी पहलुओं की जांच जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) कर रही है. बुधवार सुबह करीब साढ़े छह बजे किसी व्यक्ति ने समाजसेवी राजेश पाढ़ी को फोन कर सूचना दी कि सरबहाल क्षेत्र में पेड़ के नीचे एक नवजात शिशु मिला है. सूचना मिलने पर श्री पाढ़ी मौके पर पहुंचे. वहां एक परिवार बच्चे को अपने पास रखे हुए था.
पूछताछ में परिवार ने बताया कि एक वृद्ध महिला बच्चे को बैग में रखकर उनके पास छोड़ गई थी. चूंकि उनके बेटे-बहू की कोई संतान नहीं थी, इसलिए वे बच्चे को अपने पास रखना चाहते थे और उसे सौंपने के लिए तैयार नहीं थे. इसके बाद श्री पाढ़ी ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी और झारसुगुड़ा थाना पुलिस को सूचना दी. पुलिस, जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुनंद महाराणा तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद परिवार ने बच्चे को सौंप दिया.
इसके बाद बच्चे को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया. हालांकि मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ. कुछ समय बाद एक विधवा महिला थाने पहुंची और दावा किया कि उसी ने तड़के बच्चे को जन्म दिया था. महिला ने बताया कि उसे यह नहीं पता कि बच्चा उससे किस परिस्थिति में अलग हो गया. उसके अनुसार, रात में कुछ महिलाओं के साथ नशा करने के बाद उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई और इसके बाद क्या हुआ, उसे कुछ याद नहीं है. पुलिस महिला को भी जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है.
महिला संबलपुर जिले के कुचिंडा क्षेत्र की रहने वाली है और झारसुगुड़ा में लोगों के घरों में बर्तन साफ कर अपना जीवनयापन करती है। लगभग आठ-नौ महीने पहले उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी. जांच में यह भी सामने आया है कि महिला ने अपनी गर्भावस्था को छिपाने की कोशिश की थी. स्थानीय आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कर्मियों से पूछताछ में भी उसके गर्भवती होने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. न तो उसका स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण था और न ही गर्भावस्था संबंधी कोई दस्तावेज उपलब्ध है.
जब बच्चे को बरामद किया गया था, तब उसके शरीर पर मिट्टी लगी हुई थी. दूसरी ओर, स्वयं को बच्चे की मां बताने वाली महिला से उसके दावे के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है. फिलहाल बच्चा जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में है और उसका इलाज चल रहा है. जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि बच्चे को उसकी कथित मां को सौंपा जाएगा या किसी बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) भेजा जाएगा. बताया गया है कि संबंधित विधवा महिला के पहले से तीन बच्चे हैं. इनमें से दो अन्य स्थानों पर पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि एक छोटा बच्चा उसके साथ रहता है.
