टाटा स्टील लिमिटेड को केंद्रीय कोयला मंत्रालय की रिविजनल अथॉरिटी से बड़ी राहत मिली है. अथॉरिटी ने जिला खनन कार्यालय, रामगढ़ द्वारा कंपनी को भेजे गये 1755.10 करोड़ रुपये के भारी भरकम डिमांड नोटिस के मामले में किसी भी प्रकार की दंडात्मक या कड़ा रुख अपनाने पर फिलहाल रोक लगा दी है.
क्या था मामला?
रामगढ़ जिला खनन कार्यालय ने 30 मार्च को एक डिमांड नोटिस जारी करते हुए टाटा स्टील से 1,755,10,54,029 रुपये की मांग की थी. यह नोटिस कंपनी की वेस्ट बोकारो कोलियरी से वित्तीय वर्ष 2000-01 से 2006-07 के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक लगभग 1,62,40,399 मीट्रिक टन कोयला खनन करने के आरोप में दिया गया था.
यह मांग सुप्रीम कोर्ट के 'कॉमन कॉज बनाम भारत सरकार' मामले के फैसले के आधार पर की गयी थी. इस मांग नोटिस को अनुचित और आधारहीन बताते हुए टाटा स्टील ने 24 अप्रैल 2026 को कोयला मंत्रालय, नयी दिल्ली स्थित रिविजनल अथॉरिटी के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर की थी. इसमें झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव तथा खनन पदाधिकारी, रामगढ़ को प्रतिवादी बनाया गया था.
रिविजनल ऑथॉरिटी ने लिया फैसला
इस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसके बाद रिविजनल ऑथॉरिटी ने अपना आदेश जारी किया. 24 अगस्त को टाटा स्टील को मिले आदेश के मुताबिक, टाटा स्टील द्वारा दायर रिवीजन आवेदन को विचार के लिए स्वीकार कर लिया गया है. जब तक इस रिवीजन आवेदन पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक रामगढ़ जिला खनन पदाधिकारी या झारखंड सरकार कंपनी के खिलाफ इस डिमांड नोटिस के आधार पर कोई भी दंडात्मक या कठोर कदम नहीं उठायेगी. कंपनी ने 25 अगस्त को बीएसइ व एनएसइ को सेबी नियमों के तहत इस घटनाक्रम की आधिकारिक जानकारी दे दी है.
