मुसाबनी : लगातार बारिश के बाद एचसीएल की सुरदा माइंस के एनएस टाइप क्वार्टर क्षेत्र के पीछे स्थित पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक धंस गया. गुरुवार सुबह करीब 10 बजे हुए इस भू-धसान से पहाड़ी के ऊपरी हिस्से की गीली मिट्टी, छोटे पेड़ और झाड़ियां करीब 50 मीटर नीचे तक आ गयीं. करीब 15 फीट के परिधि क्षेत्र में हुए भू-धसान के बाद आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गयी. खासकर इसलिए कि पहाड़ी के नीचे सुरदा माइंस के थ्री और फोर शाफ्ट तथा उन्हें जोड़ने वाली भूमिगत सुरंग मौजूद है.
बारिश के बाद अचानक खिसकी पहाड़ी की मिट्टी
स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार सुबह पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से अचानक मिट्टी का मलबा नीचे आने लगा. देखते ही देखते गीली और चिकनी मिट्टी के साथ छोटे-छोटे पेड़ और झाड़ियां भी नीचे आ गयीं. कुछ वर्ष पहले भी इसी स्थान पर भू-धसान की घटना हुई थी. पहाड़ी के धंसने वाले हिस्से से करीब 50 मीटर नीचे तक मिट्टी पहुंचने के बाद आसपास के ग्रामीणों में आशंका पैदा हो गयी. स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी के ठीक नीचे सुरदा माइंस के थ्री और फोर शाफ्ट हैं. इन शाफ्ट को माइंस के अंदर से जोड़ने वाली भूमिगत सुरंग भी मौजूद है. ऐसे में लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और एहतियाती कदम उठाने की मांग की.
माइंस के अंदर भूमिगत सुरंग का भी किया निरीक्षण
घटना की जानकारी के बाद शुक्रवार सुबह सुरदा माइंस मैनेजर के नेतृत्व में कंपनी के अधिकारियों की टीम भू-धसान स्थल पर पहुंची. टीम ने पहाड़ी के ऊपर पहुंचकर धंसे हुए हिस्से का निरीक्षण किया. अधिकारियों के अनुसार, लगातार हुई बारिश के कारण पहाड़ी की ऊपरी सतह की ढीली मिट्टी गीली होकर नीचे खिसक गयी. मिट्टी के साथ छोटे जंगली पौधे और झाड़ियां भी नीचे आ गयीं. जांच टीम ने पहाड़ी से नीचे आये मलबे का जायजा लेने के साथ माइंस के अंदर थ्री और फोर शाफ्ट को जोड़ने वाली भूमिगत सुरंग का भी निरीक्षण किया. प्रबंधन के अनुसार, निरीक्षण के दौरान सुरंग में किसी तरह की परेशानी नहीं मिली.
धंसी पहाड़ी के करीब 250 मीटर नीचे हो रही माइनिंग
माइंस प्रबंधन के अनुसार, जिस स्थान पर पहाड़ी की मिट्टी खिसकी है, उसके करीब 250 मीटर नीचे माइनिंग का काम हो रहा है. वहीं, थ्री और फोर शाफ्ट को जोड़ने वाली भूमिगत सुरंग भी धंसे हुए स्थान से कुछ दूरी से गुजरती है. प्रबंधन ने स्थिति को लेकर फिलहाल किसी तरह की चिंता की बात से इनकार किया है. हालांकि, पहाड़ी पर पहले भी भू-धसान होने की बात सामने आने के बाद स्थानीय लोग मामले की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने जांच और सुरक्षा उपायों की मांग की
बारिश के बाद पहाड़ी का हिस्सा खिसकने की घटना से पहाड़ के नीचे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि माइंस क्षेत्र में पहाड़ी के नीचे शाफ्ट और भूमिगत सुरंग होने के कारण किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकती है. लोगों ने भू-धसान वाले हिस्से की विस्तृत जांच कराने, स्थिति की नियमित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम करने की मांग की है, ताकि माइंस के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ पहाड़ी के नीचे रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके.
पहाड़ के नीचे होती है माइनिंग
सुरदा माइंस के मैनेजर अमरेंद्र कुमार ने बताया - एनएस टाइप के पीछे पहाड़ी पर जिस हिस्से में भू-धसान हुआ है वह क्षेत्र फॉरेस्ट एरिया में आता है. यहां पहाड़ के नीचे माइनिंग नहीं होती है. लगातार बारिश के कारण पहाड़ के उपरी हिस्से की मिट्टी एवं मालवा नीचे गिरा है और करीब 50 मीटर क्षेत्र में फैल गया है. उन्होंने कहा - जियोलॉजिस्ट एवं अन्य अधिकारियों के साथ घटना स्थल की जांच की गयी है. डर की कोई बात नहीं है.
