Jamshedpur News : सिख बालकों ने दिखाया शौर्य, जसविंदर और जसप्रीत बने सबसे तेज धावक
Jamshedpur News : मानगो स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के परिसर में रविवार को 'होला-मोहल्ला' को समर्पित खेल उत्सव का भव्य आयोजन किया गया.
By RAJESH SINGH | Updated at :
मानगो गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में ”होला-मोहल्ला” को समर्पित खेल उत्सव का आयोजन
Jamshedpur News :
मानगो स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के परिसर में रविवार को ”होला-मोहल्ला” को समर्पित खेल उत्सव का भव्य आयोजन किया गया. बाबा बंदा सिंह बहादुर गतका अखाड़ा, धर्म प्रचार कमेटी और मानगो गुरुद्वारा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में 157 सिख बच्चों ने अपनी वीरता और खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया. आयोजन के दौरान बच्चों को सिख इतिहास और होला-मोहल्ला के महत्व से भी रू-ब-रू कराया गया.
मैदान पर दिखा बच्चों का दमखम
प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में जसविंदर सिंह और बालिका वर्ग में जसप्रीत कौर ने अपनी रफ्तार का लोहा मनवाते हुए सबसे तेज धावक का खिताब अपने नाम किया. वहीं, हर्षप्रीत सिंह ने कठिन मुकाबले में प्रतिद्वंदियों को पछाड़ते हुए ”दंड बैठक” और ”गोला फेंक” प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता. जूनियर वर्ग में संदीप सिंह और 12 वर्ष आयु वर्ग में पृथ्वीराज सिंह व गुरसिमरन कौर ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी चमक बिखेरी. बालिका वर्ग में अमृत कौर को रजत और सिमरन कौर को कांस्य पदक मिला.
अभिभावकों ने भी दिखायी खेल भावना
बच्चों के साथ-साथ उनके परिजनों के लिए भी विशेष स्पर्धाएं आयोजित की गयीं थीं. महिलाओं की दौड़ में अमनदीप कौर विजेता बनीं, जबकि नवनीत कौर और राजिंदर कौर क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर रहीं. गोला फेंक में नवनीत कौर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. इसके अलावा बोरी दौड़, स्पून मार्बल दौड़ और टोकरी गेंद जैसे मनोरंजक खेलों ने उत्सव के आनंद को दोगुना कर दिया.
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बोध
मुख्य आयोजक व मानगो गुरुद्वारा के महासचिव जसवंत सिंह जस्सू ने बच्चों को होला-मोहल्ला का गौरवशाली इतिहास बताया. उन्होंने कहा कि यह त्योहार गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा सिखों में वीरता भरने और सैन्य प्रशिक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया था. जसवंत सिंह जस्सू, सुखवंत सिंह सुक्खू, गुरशरण सिंह और बलजीत संसोआ ने मेंटर की भूमिका निभायी. कार्यक्रम को सफल बनाने में करणवीर सिंह, जीवनजोत सिंह, मनिंदर सिंह, हरप्रीत सिंह हनी, त्रिलोक सिंह समेत कई का महत्वपूर्ण योगदान रहा. अंत में सभी विजेताओं को पदक देकर सम्मानित किया गया.