संवाददाता, गालूडीह घाटशिला प्रखंड की बड़ाखुर्शी पंचायत अंतर्गत दारीसाई सबर बस्ती की 17 वर्षीय किशोरी उर्मिला सबर पिछले 15 दिनों से बीमार है. परिजन अस्पताल ले जाने के बजाय भिलाई पहाड़ी में झाड़-फूंक करवा रहे थे. स्थानीय एएनएम शिखा सामंत और सहिया पार्वती दास किशोरी की निगरानी कर रही थीं. जानकारी मिलते ही पुतड़ू गांव के समाजसेवी मंगल कर्मकार ने शनिवार को 108 एंबुलेंस बुलाकर किशोरी को अनुमंडल अस्पताल घाटशिला भिजवाया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया है.
अंधविश्वास और कुपोषण से उजड़ रही सबर बस्तीग्रामीणों के अनुसार, आर्थिक तंगी, अशिक्षा और अंधविश्वास के कारण आज भी कई सबर परिवार बीमारी की स्थिति में डॉक्टरों के बजाय ओझा-गुनी का सहारा लेते हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है. कभी दारीसाई सबर बस्ती में 20 से अधिक परिवार निवास करते थे, लेकिन अब यहां बमुश्किल एक दर्जन परिवार बचे हैं. कई घर ऐसे हैं जहां कोई चिराग जलाने वाला नहीं बचा है. अत्यधिक शराब का सेवन, पौष्टिक आहार (कुपोषण) का अभाव और बीमार होने पर समय पर इलाज न कराना सबरों की घटती आबादी का मुख्य कारण है.
