जमशेदपुर : : संताली भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए गिरिडीह में देशभर के साहित्यकारों का जुटान होगा. 2 अक्टूबर को आदिवासी बालक छात्रावास, गिरिडीह में अखिल भारतीय संताली लेखक संघ, झारखंड शाखा का 17वां एक दिवसीय वार्षिक साहित्यिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. संताली लेखक रामदास टुडू रास्का की जयंती के अवसर पर होने वाले इस सम्मेलन में झारखंड के साथ बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा समेत अन्य राज्यों से सैकड़ों साहित्यकारों और समाजसेवियों को आमंत्रित किया जायेगा.
समिति के अध्यक्ष ने आयोजन स्थल का लिया जायजा
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को समिति के अध्यक्ष दशरथ किस्कू के नेतृत्व में आयोजन स्थल का जायजा लिया गया. इस दौरान आयोजन की तैयारियों, अतिथियों के आमंत्रण, आर्थिक व्यवस्था और संताली भाषा-साहित्य के संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा की गयी. आयोजन के संभावित स्थल गिरिडीह कॉलेज हॉल का भी जायजा लिया गया. इसके बाद पूर्व में गठित आयोजन समिति के सदस्यों को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारियां सौंपी गयीं. बैठक में सम्मेलन के आय-व्यय पर भी चर्चा हुई.
साहित्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद का बनेगा मंच
आयोजकों के अनुसार, यह सम्मेलन संताली भाषा और साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद का बड़ा मंच बनेगा. अलग-अलग राज्यों से आने वाले साहित्यकारों के बीच विचारों का आदान-प्रदान भी होगा. संताली भाषा के संरक्षण और संवर्धन का मुद्दा सम्मेलन के केंद्र में रहेगा. बैठक में भाषा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. खास तौर पर संताली भाषा के पठन-पाठन और लेखन में ओलचिकी लिपि के अधिक से अधिक प्रयोग पर जोर दिया जायेगा. आयोजकों ने झारखंड सरकार से राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में संताली भाषा की पढ़ाई ओलचिकी लिपि में शुरू करने तथा संताली भाषा के शिक्षकों और प्राध्यापकों की नियुक्ति की मांग करने का भी निर्णय लिया.
नए लेखकों को मिलेगा मंच, मिलेगा मार्गदर्शन
सम्मेलन की खास पहल नवोदित संताली लेखकों को मंच देना होगी. नये लेखकों को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें वरिष्ठ साहित्यकारों से मार्गदर्शन दिलाने की योजना है. अध्यक्ष दशरथ किस्कू ने कहा - गिरिडीह क्षेत्र में इस तरह का साहित्यिक आयोजन पहली बार होने जा रहा है. उन्होंने कहा - सम्मेलन के जरिये क्षेत्र के लोगों को महान संताली लेखक रामदास टुडू रास्का और ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के जीवन-दर्शन को करीब से जानने और समझने का अवसर मिलेगा.
बैठक में ये थे उपस्थित
बैठक में दीवान बेसरा, मोहन चंद्र बास्के, मानिक हांसदा, रतन मरांडी, बैजू मांडी, नुनका टुडू, अजय मुर्मू, शनिचर बेसरा, शिकेश सोरेन, सुधीर चंद्र मुर्मू, आदित्य बेसरा, सोनालाल मुर्मू, सूरज मुर्मू, मेरुलाल मोरांडी, प्रेम टुडू, मदन हेम्ब्रम, प्रदीप सोरेन, जरिंता हांसदा, प्रमिला हांसदा आदि मौजूद थे.
