आबुआ आवास योजना के काम में धीमी प्रगति पर डीडीसी ने की कार्रवाई
Jamshedpur News :
पूर्वी सिंहभूम जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी ””आबुआ आवास”” योजना की धीमी प्रगति पर जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है. बुधवार को उप विकास आयुक्त नागेंद्र पासवान ने काम में घोर लापरवाही और सुस्ती बरतने वाले 25 पंचायत सचिवों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक देने का निर्देश दिया है. साथ ही, 22 अन्य पंचायत सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए अंतिम चेतावनी दी है.
जिले की रैंकिंग गिरी
अबुआ आवास योजना में राज्य के सभी 24 जिलों में पूर्वी सिंहभूम की रैंकिंग लगातार गिर रही है. समीक्षा में पाया गया कि कई लाभुकों को तीसरी किस्त जारी किये जाने के दो माह बाद भी आवास का निर्माण पूरा नहीं हुआ है. डीडीसी ने स्पष्ट किया कि लाभुकों के बैंक खाते में राशि भेजने के बाद उसकी मॉनिटरिंग और निर्माण पूरा कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी पंचायत सचिवों की थी, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे.
इन क्षेत्रों में सबसे खराब स्थिति
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, पोटका प्रखंड की चांदपुर और धीरौल पंचायत में प्रगति 0% पायी गयी. वहीं, गुड़ाबांदा की अंगारपाड़ा में मात्र 7.69% और चाकुलिया की मालकुंडी पंचायत में 21.05% ही काम हुआ है. इसी तरह घाटशिला, डुमरिया और धालभूमगढ़ की कई पंचायतों में लक्ष्य के मुकाबले काम बेहद कम पाया गया.
इन पंचायत सचिवों का वेतन रोका
पोटका प्रखंड की चांदपुर, धीरौल, गंगाडीह, नरदा, शंकरदा, डोमजुड़ी पंचायत, डुमरिया प्रखंड की कांटाशोल, धोलाबेड़ा, केंदुआ, कुमारशोल, बांकीशोल पंचायत, घाटशिला प्रखंड की वनकांटी, आसना, बांकी पंचायत, गुड़ाबांदा प्रखंड की अंगारपाड़ा, मुराकांटी, गुडाबांदा पंचायत, चाकुलिया प्रखंड की मालकुंडी, सरडीहा, कालापाथर, पटमदा प्रखंड की माहुलबेना, कमलपुर पंचायत, बहरागोड़ा प्रखंड की गम्हरिया, मुसाबनी प्रखंड की बदिया और धालभूमगढ़ प्रखंड की जुग्गीशोल पंचायत के सचिवों का वेतन रोका गया है.
इन पंचायतों के सचिवों से पूछा गया स्पष्टीकरण
बहरागोड़ा प्रखंड की चेगड़ा पंचायत, बोड़ाम प्रखंड की बोंटा, लायलम, पहाड़पुर पंचायत, चाकुलिया प्रखंड की बाड़ामारा, लोधाशोली पंचायत, डुमरिया प्रखंड की खैरबनी, आस्था कोवाली पंचायत, घाटशिला प्रखंड की बागुड़िया, कालचीती, गोपालपुर पंचायत, गुड़ाबांदा प्रखंड की बालीजुड़ी, बनमाकड़ी, मुसाबनी प्रखंड की मेरिया, पटमदा प्रखंड की खेड़ुवा, कसमार, जोड़सा, ओड़िया, लच्छीपुर और पोटका प्रखंड की चाकरी, हातिबिंदा व जानमडीह पंचायत के सचिवों से स्पष्टीकरण पूछा गया है.
तीनों किस्त मिलने के दो माह बाद भी काम अधूरा
आबुआ आवास योजना के तहत लाभुकों को पहली किस्त में 30 हजार, दूसरी में 50 हजार और तीसरी किस्त में एक लाख रुपये दिये जाते हैं. नियमतः तीसरी किस्त मिलने के एक माह के भीतर आवास का निर्माण पूरा कर लेना है, लेकिन जिले की कई पंचायतों में लाभुक पैसे लेकर काम लटकाये हुए हैं और पंचायत सचिवों ने इसकी सुध नहीं ली, जबकि मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों की है. ये मामले वित्तीय वर्ष 2024-25 में आबुआ आवास निर्माण के हैं.
कोट…
आबुआ आवास योजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. लाभुकों को पैसे मिलने के बाद भी मकान नहीं बनना अधिकारियों की अकर्मण्यता को दर्शाता है. जिले की रैंकिंग सुधारने और गरीबों को घर दिलाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है. साप्ताहिक समीक्षा जारी रहेगी, जो काम नहीं करेंगे उनका वेतन बंद ही रहेगा.
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