जमशेदपुर | सरकारी फाइलों और पोर्टलों में गरीबों का पेट भले भर गया हो, लेकिन हकीकत में उनकी थाली खाली है. जमशेदपुर की जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) का सच सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. रिकॉर्ड में अनाज गोदाम से उठ चुका है और ऑनलाइन पोर्टल पर उसका वितरण भी दिखाया गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि राशन दुकान तक अनाज पहुंचा ही नहीं है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर यह अनाज गया कहां. इसे जमीन निगल गयी, आसमान खा गया या फिर बिचौलिये डकार गये. रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर पूरे मामले में गंभीर अनियमितता और संभावित घोटाले की आशंका पैदा करता है.
21 दुकानों तक नहीं पहुंचा अनाज
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन पूर्वी सिंहभूम के प्रतिनिधिमंडल ने विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी आनंद जी राहुल जी के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा. एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन साव पारस के नेतृत्व में सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि बर्मामाइंस और जमशेदपुर प्रखंड एसएफसी गोदाम से जुलाई और अगस्त माह का राशन क्षेत्र के लगभग 21 पीडीएस डीलरों तक (डोर स्टेप डिलेवरी के माध्यम से) भेजा ही नहीं गया है. कुछ दुकानों पर सिर्फ गेहूं की आधी-अधूरी सप्लाई दी गयी और चावल पूरी तरह गायब कर दिया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन पोर्टल पर 83% राशन वितरण संपन्न दिखाया जा रहा है.
एसोसिएशन ने उठायी आवाज, तत्काल हो आपूर्ति और गोदामों की जांच
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन साव पारस, संरक्षक शंकर पोद्दार, महासचिव प्रमोद गुप्ता और पप्पू कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने मांग की है कि बर्मामाइंस और जमशेदपुर प्रखंड एसएफसी गोदाम से रुके हुए राशन की अविलंब आपूर्ति सुनिश्चित करायी जाये. साथ ही इस बात की उच्चस्तरीय जांच हो कि जब 21 दुकानों को राशन मिला ही नहीं, तो सरकारी पोर्टल पर 83% वितरण दर्ज कराने वाला यह अदृश्य जादूगर कौन है.
डीलरों पर फूट रहा कार्डधारियों का गुस्सा
महीनों से राशन नहीं मिलने से परेशान कार्डधारियों का सारा गुस्सा डीलरों पर फूट रहा है. डीलरों का कहना है कि वे दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ गोदाम से उन्हें राशन नहीं मिल रहा और दूसरी तरफ कार्डधारी उन्हें चोर समझकर विवाद कर रहे हैं.
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन पूर्वी सिंहभूम के अध्यक्ष मोहन साव पारस ने कहा - जब ऑनलाइन सिस्टम में 83% दिख रहा है, तो चावल गया कहां. हम दिनभर कार्डधारियों के ताने और गुस्सा सहने को मजबूर हैं. जबकि गलती गोदाम और सप्लाई सिस्टम की है.
