वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने अपराध पर रोक लगाने और गश्ती व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में सोमवार से नई पहल शुरू की. साकची स्थित कंपोजिट कंट्रोल रूम (सीसीआर) में एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने क्यूआर कोड आधारित डिजिटल बीट पुलिसिंग सिस्टम की शुरुआत की है. इसके साथ ही जिले के सभी पीसीआर, टेंगो मोबाइल, थाना गश्ती दलों और बीट पदाधिकारियों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई.
हर शिफ्ट में दो बार स्कैनिंग जरूरी
नई व्यवस्था के तहत जिले के चिन्हित स्थानों पर लगाए गए क्यूआर कोड को गश्ती दल को हर शिफ्ट में कम से कम दो बार स्कैन करना होगा. स्कैन करते ही संबंधित टीम की मौजूदगी की जानकारी सीधे सीसीआर के सर्वर पर दर्ज हो जाएगी. इससे सीनियर अधिकारी किसी भी समय यह देख सकेंगे कि कौन-सी टीम किस इलाके में गश्त कर रही है.
एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने बताया कि पिछले पांच वर्षों के अपराध रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद जिले के ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां अपराध की घटनाएं अधिक होती रही हैं. इन्हीं इलाकों के अलावा बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बैंक, एटीएम और अन्य संवेदनशील जगहों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं. इन सभी की निगरानी रक्षक एप के माध्यम से की जाएगी. इससे गश्ती व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी.
जिले को 206 बीट में बांटा गया
एसएसपी ने बताया कि पूरे पूर्वी सिंहभूम जिले को 206 बीट में विभाजित किया गया है. इनमें 102 बीट शहरी और 104 बीट ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. हर बीट के लिए थाना स्तर पर एक बीट पदाधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है. इनका काम नियमित गश्त करना, स्थानीय लोगों से संपर्क बनाए रखना, खुफिया सूचनाएं जुटाना और अपने क्षेत्र में अपराध पर नजर रखना होगा. प्रत्येक बीट का पूरा रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा.
1000 से ज्यादा जगहों पर लगाए गए क्यूआर कोड
पुलिस ने जिले के क्राइम हॉटस्पॉट, भीड़भाड़ वाले बाजार, सार्वजनिक स्थल, बस और रेलवे स्टेशन, बैंक, एटीएम तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर अब तक 1000 से ज्यादा क्यूआर कोड लगाए हैं. पीसीआर, टेंगो मोबाइल और थाना गश्ती वाहनों को हर शिफ्ट में कम से कम दो बार इन क्यूआर कोड को स्कैन करना अनिवार्य होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि गश्ती दल निर्धारित क्षेत्रों में नियमित रूप से पहुंच रहा है.
एसएसपी ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत करना भी है. पुलिस की सक्रिय मौजूदगी बढ़ने से अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और आम लोगों को बेहतर पुलिसिंग का लाभ मिलेगा.
