घाटशिला: एक महीने से जंगलों में चल रहे ऑपरेशन के बाद भी पुलिस के हाथ खाली, आखिर कहां गायब है असीम मंडल ?

झारखंड-बंगाल सीमा पर एक महीने से जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन के बावजूद कुख्यात नक्सली असीम मंडल का कोई सुराग नहीं मिला है. पुलिस की घेराबंदी जारी है.

घाटशिला: झारखंड-बंगाल सीमा पर दलमा से घाटशिला के बीहड़ों में एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल की तलाश में एक माह से चल रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन के बावजूद पुलिस के हाथ अबतक खाली है.

हालांकि, केशरपुर, भोमराडीह और कालिचती समेत कई स्थानों पर बने पिकेटों में अब भी कोबरा के जवान तैनात हैं. समय-समय पर अभियान चलाया जा रहा है. असीम मंडल का अब तक पुलिस से आमना-सामना नहीं हुआ है.

दलमा से घाटशिला तक खंगाले गये बीहड़

सूत्रों के अनुसार, सारंडा से भागने के बाद असीम मंडल अपने साथियों के साथ दलमा और फिर घाटशिला के जंगलों की ओर बढ़ा था. झाटीझरना के लखाइसीनी में उसके ठहरने के संकेत मिले थे, जिसके बाद सुखना पहाड़ पर ठिकाना बनाने की सूचना पर कोबरा बटालियन के जवानों को जंगलों में उतारा गया.

जवानों ने पहाड़ों की कड़ी घेराबंदी कर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया. पुलिस ने गुड़ाझोर और मिर्गीटांड़ समेत पहाड़ों पर बसे कई बीहड़ गांवों में घर-घर जाकर तलाशी अभियान भी चलाया, ताकि यह पता चल सके कि कहीं वह किसी घर में तो नहीं छिपा है, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा.

मदन महतो, सागर सिंह और मीना हुए गिरफ्तार

महीनों तक स्टेट पुलिस और कोबरा बटालियन की टुकड़ियों ने दलमा से घाटशिला तक के जंगलों में पसीना बहाया, हालांकि इस दौरान पुलिस को आंशिक सफलता जरूर मिली. असीम मंडल के गुट के मदन महतो, सागर सिंह और मीना पुलिस के हत्थे चढ़ गये और उनके पास से हथियार भी बरामद किये गये.

सचिन, मीता और अन्य साथी भी अब तक दूर

पहले इस तरह बीहड़ असीम मंडल लगाते थे कैंप

असीम मंडल के साथ-साथ उसके करीबी सहयोगी सचिन उर्फ राम प्रसाद मार्डी, उसकी नक्सली पत्नी मीता, बुलू, समीर उर्फ मंगल महतो और मालती मुर्मू भी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. कुख्यात नक्सली की तलाश के लिए बंगाल में 25 जनवरी 2017 को सरेंडर कर चुके, सांसद सुनील महतो हत्याकांड के मुख्य शूटर रहे रंजीत पाल उर्फ राहुल को भी पुलिस अपने साथ बीहड़ों में लेकर गयी थी. चूंकि राहुल इस इलाके से अच्छी तरह वाकिफ था और लंबे समय तक यहां सक्रिय रहा था, इसलिए पुलिस को उम्मीद थी कि इससे मदद मिलेगी, लेकिन कोई विशेष फायदा नहीं हुआ.

बीहड़ों में दुबका है या अन्यत्र भाग गया असीम?

लंबे समय तक चले पुलिसिया ऑपरेशन और सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बावजूद असीम मंडल का सुराग न मिलना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है. सवाल यह है कि क्या असीम मंडल और उसके साथी अब भी दलमा से घाटशिला के बीच के बीहड़ों में छिपा बैठा है या फिर वे पुलिस को चकमा देकर किसी अन्य सुरक्षित ठिकाने पर निकल चुके हैं? यदि वे यहीं हैं, तो उन्हें भोजन और पानी जैसी जरूरी चीजें कहां से मिल रही हैं? फिलहाल इन सवालों के बीच इलाके में सस्पेंस बरकरार है. सुरक्षा बलों की निगाहें लगातार बनी हुई हैं.



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लेखक के बारे में

By मो. युनूस परवेज

मो. युनूस परवेज वर्ष 1995 से पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने घाटशिला महाविद्यालय और रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और राजनीतिक विज्ञान ऑनर्स की डिग्री हासिल की है. इनकी राजनीति, अपराध, नक्सलवाद, खेल, शिक्षा और खेती किसानी की खबरों में विशेष रुचि है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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