जमशेदपुर एमजीएम की बड़ी उपलब्धि, पहली बार हुई घुटने की सफल ऑर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी

Jamshedpur: एमजीएम मेडिकल, जमशेदपुर में पहली बार घुटने की सफल ऑर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी की गई. इस उपलब्धि से अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं को नई पहचान मिली है और मरीजों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. पूरी खबर नीचे पढ़ें...

Jamshedpur: एमजीएम अस्पताल में पहली बार घुटने की ऑर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गयी. इस बेहद जटिल ऑपरेशन के साथ ही एमजीएम में अब न्यूनतम चीरा आधारित अस्थि रोग सेवाओं की औपचारिक शुरुआत हो गयी है. यह पूरी प्रक्रिया विभागाध्यक्ष डॉ वाइ सांगा के कुशल नेतृत्व में किया गया. एमजीएम अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 33 वर्षीय मरीज नीलम कुमारी लंबे समय से अपने घुटने की समस्या को लेकर परेशान थी. उसे घुटना मोड़ने में काफी कठिनाई होती थी और पैर को ज्यादा मोड़ने पर असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता था. स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने उसे 16 जून को एमजीएम अस्पताल के ऑर्थो विभाग में भर्ती कराया.

गैंग्लियन सिस्ट को पूरी तरह हटाया गया

अस्पताल के डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए मरीज की जांच और एमआरआई कराने की सलाह दी. एमआरआई रिपोर्ट से पता चला कि महिला के घुटने के लिगामेंट्स के ठीक बीच में एक ‘गैंग्लियन सिस्ट’ (एक प्रकार की गांठ) विकसित हो गया है, जो दर्द और गतिरोध का मुख्य कारण है. उसके बाद डॉक्टरों की एक विशेष टीम का गठन किया गया. 17 जून को अस्पताल की यूनिट-3 में यूनिट प्रमुख सह सहायक प्राध्यापक डॉ मृत्युंजय कुमार के नेतृत्व में सर्जरी की प्रक्रिया शुरू की गयी. इस सफल ऑपरेशन में वरिष्ठ डॉक्टर शुभजीत हलदर और रत्नजीत चक्रवर्ती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

अत्याधुनिक दूरबीन विधि से हुआ ऑपरेशन

चिकित्सकों ने उन्नत ऑर्थ्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए मरीज के घुटने में छोटे-छोटे कीहोल (बारीक सुराख) चीरे लगाये. इस अत्याधुनिक दूरबीन विधि के माध्यम से डॉक्टरों ने बेहद सटीकता के साथ आसपास के स्वस्थ ऊतकों (टीश्यूज) को बिना नुकसान पहुंचाये लिगामेंट्स के बीच फंसे गैंग्लियन सिस्ट को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया. ऑपरेशन पूरी तरह से सफल रहा और इस दौरान किसी भी प्रकार की चिकित्सीय जटिलता सामने नहीं आयी.

मरीज को मिली राहत, तेजी से हो रहा सुधार

डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज नीलम कुमारी को दर्द से पूरी तरह राहत मिल गयी है. प्रभावित घुटने की मूवमेंट (गति) अब पूरी तरह सामान्य हो चुकी है. पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में ऑर्थ्रोस्कोपी एक बेहद प्रभावी और सुरक्षित तकनीक है. इसमें खून का बहाव नाममात्र का होता है, ऑपरेशन के बाद दर्द या असुविधा बहुत कम होती है और मरीज बेहद तेजी से स्वस्थ होकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है. ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की आधुनिक सर्जरी की शुरुआत कोल्हान क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित होगी. अब लोगों को महंगे इलाज के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. बाहर में इस ऑपरेशन के लिए लाखों रुपये लगते, जो एमजीएम अस्पताल में नि:शुल्क किया गया.

समय पर अस्पताल नहीं आ रहे कर्मचारी, होगी कार्रवाई

एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ संजय कुमार ने अस्पताल के सभी विभागाध्यक्ष को पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया कि ऐसी सूचना मिल रही है कि अपने अधीनस्थ सभी चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति दोनों पालियों में सुनिश्चित कराते हुए आदेश दिया जाये कि अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक और उपस्थिति पंजी में दर्ज करते हुए निर्धारित वर्दी में ससमय अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचे. निरीक्षण के दौरान अगर कोई भी समय पर नहीं मिलते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

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Published by: AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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