युवाओं को अपने पूर्वजों के बनाये धर्म-संस्कृति से रूबरू करायेगा माझी परगना महाल

नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं से जोड़ने के लिए संताल समाज एक बड़ा कदम उठा रहा है. 6 सितंबर को करनडीह में आयोजित होने वाले धर्म सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को समाज की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराना है.

जमशेदपुर : तेजी से बदलते दौर में नई पीढ़ी अपनी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं से दूर होती जा रही है. इसे लेकर संताल समाज ने एक बड़ी पहल शुरू की है. युवाओं, महिलाओं और छात्र-छात्राओं को अपनी संस्कृति और पूजा पद्धति से जोड़ने के लिए सितंबर में धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. सम्मेलन के माध्यम से समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा.

6 सितंबर को करनडीह में होगा धर्म सम्मेलन

सुंदरनगर क्षेत्र के पुरीहासा परगना बाखुल में माझी परगना माहाल पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था जुगसलाई तोरोप के माझी बाबा, पारानिक और गोडेत बाबाओं की बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता परगना दशमत हांसदा ने की. इस दौरान आगामी 6 सितंबर को करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में एक दिवसीय धर्म सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया.

युवाओं को परंपराओं से जोड़ने पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक को संबोधित करते हुए परगना दशमत हांसदा ने कहा कि प्रचार-प्रसार के अभाव में समाज के लोग अपनी मूल परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं. खासकर युवाओं की भागीदारी में कमी चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि धर्म सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को समाज की समृद्ध परंपराओं, पूजा पद्धति और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना है.

धार्मिक धरोहरों के संरक्षण का लिया जाएगा संकल्प

सम्मेलन के दौरान मरांगबुरु, लुगू बुरु, आजोदिया बुरु और राजरप्पा स्थित जांङ बाहा तुपुनाई घाट जैसे आस्था के प्रमुख केंद्रों के संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया जाएगा. समाज के लोगों का मानना है कि इन धार्मिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है.

सम्मेलन को सफल बनाने के लिए बनाई गईं अलग-अलग समितियां

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रचार-प्रसार, भोजन, मंच-पंडाल निर्माण और अतिथि सत्कार के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया. बैठक में समाज के कई पारंपरिक अगुआ और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.


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लेखक के बारे में

By दशमत सोरेन

दशमत सोरेन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया है. वे 29 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनकी विशेषज्ञता मुख्य रूप से झारखंड की आदिवासी-मूलवासी राजनीति, स्थानीय समुदायों की भाषा-संस्कृति और यहां के सामाजिक ताना-बाना है. वे वर्ष 2010 से प्रभात खबर के साथ एक ट्राइबल रिपोर्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

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